शक्तिशाली लोगों में कुदरत के साथ चलने का भाव होता है। वह वासना त्याग की बातें ज़्यादा नहीं करते। जो लोग वासना त्याग की प्रैक्टिस करते हैं, वे लोग फ़ेल हो जाते हैं। इसलिए धार्मिकता की आदत डाली जाती है और इस आदत में तमाम मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्रियाओं में संघर्ष मचता है।
जब ताक़तवर लोग इतने कमज़ोर थे कि वे कमज़ोर को नुक़सान नहीं पहुँचा सकते थे, तब कमज़ोर व्यक्तियों को इतना मज़बूत होना चाहिए था कि वे चले जाते।
आदमी अकेला भी बहुत कुछ कर सकता है। अकेले आदमियों ने ही आदि से विचारों में क्रांति पैदा की है। अकेले आदमियों के कृत्यों से सारा इतिहास भरा पड़ा है।
युवक; युवक ही क्या, यदि उसमें उत्साह और ओज न हो।
यदि तेरी पुकार सुनकर कोई न आए तो तू अकेला ही चल।
युवकत्व का सबसे बड़ा प्रमाण ही यह है कि भावनाओं का वह पुंज हो और अखिल उत्साह का स्त्रोत।
समय बीतने पर उपार्जित विद्या नष्ट हो जाती है, मज़बूत जड़ वाले वृक्ष भी गिर पड़ते हैं, जल भी सरोवर में जाकर (गर्मी आने पर) सूख जाता है। किंतु हुत (हवनादि किया हुआ पदार्थ) या सत्पात्त को दिए दान का पुण्य ज्यों का त्यों बना रहता है।
प्रेम-कथाओं में वर्णित प्रेम की सुकोमलता मनुष्य को दुर्बलता की ओर नहीं, निश्चल दृढ़ता की ओर अग्रसर करती है।
स्वयं को विरोधियों के तर्कों का सामना करने लायक बनाने के लिए अध्ययन करो।
भीष्म समाप्त हो गए, द्रोण मारे गए, कर्ण का भी नाश हो गया। अब पांडवों को शल्य जीत लेगा ऐसी आशा है। हे राजन्! आशा बड़ी बलवती होती है।
दुर्बलतम शरीरों में अहंकार प्रबलतम होता है।
जो बुद्धि में बली होते हैं, वे ही बलिष्ठ माने जाते हैं, जिनमें केवल शारीरिक बल होता है, वे वास्तव में बलवान नहीं समझे जाते।
सबसे अधिक शक्तिशालियों के भी क्षण आते हैं जब वे थक जाते हैं।
याद रखिए, मज़बूत रिश्ता वही है, जो आपकी ज़िंदगी को बेहतर बनाए, न कि ख़ुद में आपके यक़ीन को ही ध्वस्त कर दे।
जिसमें तेज है, वही बलवान् है! स्थूल व्यक्तियों का क्या विश्वास?
सशक्त तर्क सशक्त कार्यों के जनक हैं।
हे राजन्! एक ओर बलवान हो ओर दूसरी ओर युद्ध का अभ्यासी, तो उनमें युद्ध का अभ्यास करने वाला ही बड़ा माना जाता है।
जनमत विधायिका की अपेक्षा अधिक सशक्त होता है। और लगभग उतना ही शक्तिशाली है जितने दस धर्मनियम।
वह जो हमारी जान नहीं ले लेता, हमें और मज़बूत बनाता है।
बहुत दिन हो जाने से मंसूर का क़िस्सा पुराना पड़ गया है, मैं सूली पर चढ़कर उसे फिर ताज़ा कर रहा हूँ, दार और रसन का जलवा फिर चमक कर दिखाता हूँ।
बहुतेरे अधिक शक्तिशाली शत्रु नाना प्रकार के उपायों और कुटनीति के प्रयोगों द्वारा वध्य होते हैं।