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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

16 दिसम्बर 2024

‘बेहतर गद्य लिखने के 30 ज़रूरी और जानदार नुस्ख़े’

‘बेहतर गद्य लिखने के 30 ज़रूरी और जानदार नुस्ख़े’

• जल्दी-जल्दी में लिखी गईं गोपनीय नोटबुक्स और तीव्र भावनाओं में टाइप किए गए पन्ने, जो ख़ुद की ख़ुशी के लिए हों। • हर चीज़ के लिए समर्पित रहो, हृदय खोलो, ध्यान देकर सुनो। • कोशिश करो कि कभी अपने

14 दिसम्बर 2024

नागरीप्रचारिणी सभा की मनोरंजन पुस्तकमाला

नागरीप्रचारिणी सभा की मनोरंजन पुस्तकमाला

अँग्रेज़ी की प्रसिद्ध पुस्तक के इस शीर्षक ने हिंदी में उस महान् मुहावरे को जन्म दिया; जिसके शब्द हैं : सादा जीवन उच्च विचार। यह किताब सन् 1897 में पहली बार प्रकाशित हुई थी और अँग्रेज़ी-साहित्य में इस

12 दिसम्बर 2024

नल-दमयंती कथा : परिचय, प्रेम और पहचान

नल-दमयंती कथा : परिचय, प्रेम और पहचान

“...और दमयंती ने राजा नल को परछाईं से पहचान लिया!” स्वयंवर से पूर्व दमयंती ने नल को देखा नहीं था, और स्वयंवर में भी जब देखा तो कई नल एक साथ दिखे। इनके बीच से असली नल को पहचान लेना संभव नहीं था। 

10 दिसम्बर 2024

रूढ़ियों में झुलसती मजबूर स्त्रियाँ

रूढ़ियों में झुलसती मजबूर स्त्रियाँ

पश्चिमी राजस्थान का नाम सुनते ही लोगों के ज़ेहन में बग़ैर पानी रहने वाले लोगों के जीवन का बिंब बनता होगा, लेकिन पानी केवल एक समस्या नहीं है; उसके अलावा भी समस्याएँ हैं, जो पानी के चलते हाशिए पर धकेल

09 दिसम्बर 2024

पीपर पात सरिस मन डोला

पीपर पात सरिस मन डोला

कहीं से लौट रहा हूँ और कहीं जा रहा हूँ। आज पैसे मिले थे तो कैब की सवारी है और साहित्यिक ब्लॉगों पर अक्टूबर की रूमानियत। आगे नवरात्र के पंडाल की भीड़ और लाउडस्पीकर, पीछे लेखकीय आभा में कुछ संवेदनहीन ल

08 दिसम्बर 2024

हान कांग के उपन्यासों में अवसाद

हान कांग के उपन्यासों में अवसाद

Is it true that human beings are fundamentally cruel? Is the experience of cruelty the only thing we share as a species? (The Prisoner 1990, Human Acts) हान कांग के उपन्यासों को पढ़ने की होड़ और

06 दिसम्बर 2024

शरद ऋतु में, शरद ऋतु में, शरद ऋतु में ही

शरद ऋतु में, शरद ऋतु में, शरद ऋतु में ही

मैं पानी पी रही हूँ और तभी जब पानी मेरे गले से होता हुआ भीतर जाता महसूस हो रहा है, उसी पल कोयल की आवाज़ आने लगी। उस क्षण मुझे लगा मेरे कंठ से आवाज़ आएगी और कोयल कंठ के साथ गाती रहेगी। चार क़दम चलक

05 दिसम्बर 2024

भारत कृषिप्रधान देश हुआ करता था!

भारत कृषिप्रधान देश हुआ करता था!

बरसात का मौसम हर साल प्रकृति को साफ़ करने में योगदान करे या न करे लेकिन भौतिक विकास का प्रपंच किस राज्य की नगरपालिका ने कितना ज़्यादा किया है—यह क्रमशः दिखाने में कसर नहीं छोड़ता; और छोड़े भी क्यों ज

03 दिसम्बर 2024

बेकल उत्साही : मैं ख़ुसरो का वंश हूँ, हूँ अवधी का संत

बेकल उत्साही : मैं ख़ुसरो का वंश हूँ, हूँ अवधी का संत

अवधी में रोमानी कविता की भी एक संवृद्ध परंपरा रही है, जिसकी शुरुआती मिसाल हम अबुल हसन यमीन उद-दीन ख़ुसरो (1253-1325 ई.) के यहाँ देख सकते हैं। उनका एक प्रसिद्ध कथन है कि “मैं हिंदुस्तान की तूती हूँ। अ

02 दिसम्बर 2024

रूमानियत पर एक रूमानी बातचीत

रूमानियत पर एक रूमानी बातचीत

एक रोज़ जब लगभग सन्नाटा पसरने को था, मैंने अपने साथ खड़े लेखक से पूछा, “आप इतनी रूमानियत अपनी रचनाओं में क्यों भरते हैं? क्या आपको लगता है कि इंसान अपने अकेलेपन में ऐसे सोचता होगा?” हम रास्ते पर च