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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

03 मार्च 2026

‘बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम’

‘बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम’

धार्मिक-ग्रंथों और पुराणों के अनुसार काशी जिसे स्वयं शिव के त्रिशूल पर टिकी नगरी माना जाता है, संसार के उन विरल स्थानों में से एक है जहाँ मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार माना जाता है। शास्त्र

02 मार्च 2026

होली खेलें रघुवीरा अवध में

होली खेलें रघुवीरा अवध में

बसंत को लेकर अब तक इतना गाया-बजाया गया, इतना लिखा-पढ़ा गया, इतना ढोल-नगाड़ा-झाँझ पीटा गया, इतनी धुन-रागिनियाँ बनीं—फिर भी आज तक न तो कोई इससे ऊबा और न उकताया। ऐसा क्या है कि पपीहे और कोयल की एक ही रट भ

28 फरवरी 2026

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भाया कावळियाँ लाय दो जी, कावळियाँ पेरीनऽ मी तो भोंगर्यों देखूँगा। यह एक निमाड़ी गीत है। मध्य प्रदेश के निमाड़ और मालवा अंचल में यह गीत काफ़ी लोकप्रिय है। इस गीत के माध्यम से बहन अपने भाई से मनुहा

25 फरवरी 2026

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट नित्यकर्म की तरह हो चला है। हर रोज़ क्रिकेट खेला जा रहा है। हर रोज़ फेंकी जा रही है बॉल, हर रोज़ घुमाया जा रहा है बल्ला और हर रोज़ ही छूट रही हैं कैचें! इस रोज़मर्रा की क्

24 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा

24 फरवरी 2026

तुम्हें विदा करने में असमर्थ हूँ!

तुम्हें विदा करने में असमर्थ हूँ!

यह दिन पिछले दिनों से कितने भिन्न हैं, इन दिनों तुम्हें खोने के भय के सिवा मेरे पास और कुछ भी नहीं। प्रेम-प्रसंग के ये अंतिम दिन इतने अरुचिकर और अवसादमय भी हो सकते हैं, यह मैंने कभी नहीं सोचा था। सोच

23 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद

23 फरवरी 2026

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

आजकल साहित्य-उत्सवों, सम्मेलनों और पुस्तक मेलों की धूम है। वैसे उत्सव और सम्मेलन हमेशा से समाज के बहुमूल्य अंग रहे हैं। हर जाति, धर्म और समुदाय अपने-अपने स्तर पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन करवाते हैं,

22 फरवरी 2026

प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा

प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा

मेरानो, 15 जून 1920 मंगलवार इस अलस्सुबह मैंने फिर तुम्हें स्वप्न में देखा। हम साथ बैठे थे और तुम मुझे दूर कर रही थीं—ग़ुस्से से नहीं, सहज आत्मीयता से। मैं बेहद दुखी था। इसलिए नहीं कि तुम मुझे दूर

22 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है। इसलिए कभी राजेश जोशी ने अरुण कमल की कविता के लिए कहा था, ‘‘उनके यहाँ कल्पनाशीलत