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पत्र पर बेला

पत्र बातों और भावनाओं

को शब्दों में प्रकट कर संवाद करने का एक माध्यम है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें पत्र प्रमुख तत्त्व और प्रसंग की तरह कविता में उपस्थित हुए हैं।

26 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : ए बछरेर एटाइ शेष चिठि, मंजरी!

शनिवारेर चिट्ठी : ए बछरेर एटाइ शेष चिठि, मंजरी!

अह, शनिवार-शनिवार तुम्हें चिट्ठी भेजने का यह हाल का सिलसिला अब यहीं शेष हुआ चाहता है, मंज! यह चीज़ों को उसकी सुंदरता में रखने और सुंदरता में ही विश्राम सौंप देने की युक्ति न हुई तो और क्या, कहो! अधिक

18 सितम्बर 2026

चाहता तो बच सकता था... : ‘जेन-ज़ी का तोता’ वाले आनंद हर्षुल के नाम पत्र

चाहता तो बच सकता था... : ‘जेन-ज़ी का तोता’ वाले आनंद हर्षुल के नाम पत्र

दिनांक : 18 सितंबर 2026 प्रतिष्ठा में, ‘जेन-ज़ी का तोता’ के लेखक श्री आनंद हर्षुल, यह पत्र इस आग्रह के साथ शुरू कर रहा हूँ कि आप मेरे संबोधन को स्वयं को एक कहानी विशेष के लेखक में परिसीमित करने

11 सितम्बर 2026

ममता कालिया के नाम एक छात्र का खुला ख़त

ममता कालिया के नाम एक छात्र का खुला ख़त

आदरणीय ममता कालिया जी, नमस्कार! “रात-रात नींद नहीं आती। दिन ऐसे बीतते हैं, जैसे भूतों के सपनों की एक रील पर दूसरी रील चढ़ा दी गई हो और भूतों की आकृतियाँ और डरावनी हो गई हों।” विद्यानिवास मिश

08 सितम्बर 2026

खोटी सीख देने वाले, गोली मारने वालों से भी अधिक बुरे होते हैं

खोटी सीख देने वाले, गोली मारने वालों से भी अधिक बुरे होते हैं

यह पत्र विजयदान देथा का चंद्रप्रकाश देवल (सी.पी. देवल) को लिखे एक सीख-रूपी पत्र का अनुवाद है। संयोग से सी.पी. देवल विजयदान देथा के जँवाई हैं। सो, इस पत्र में उनका ‘ससुर’ रूप भी सीख के बहाने बीच-बीच म

26 जुलाई 2026

शशिभूषण द्विवेदी के नाम : बारह कथाकारों, दो कवियों और एक आलोचक के पत्र

शशिभूषण द्विवेदी के नाम : बारह कथाकारों, दो कवियों और एक आलोचक के पत्र

आज शशिभूषण द्विवेदी [26 जुलाई 1975—7 मई 2020] की जन्मतिथि है। वह आज सदेह होते, तब आज उनका बावनवाँ वर्ष लग जाता। एक रचनाकार रचना के लिए एक कंदरा का निर्माण करता है। इस कंदरा में वह संसार से थक-भागकर छ

25 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश

31 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

• नये काम करना मुश्किल नहीं, मुश्किल है पुराने काम नये ढंग से करना। • काम करने के लिए, काम न कर सकने वाली परिस्थितियाँ चाहिए। • रोना अकेले की चीज़ है। • वे जिनकी रचनाएँ ‘राजनीतिक’ नहीं, ऐसे अ

23 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

डेरा मनुष्य अपने घर के बारे में सबसे कम तब सोचता है, जब वह अपने घर का निवासी होता है। तब घर की उपस्थिति इतनी स्वाभाविक होती है कि वह लगभग अदृश्य हो जाता है। बचपन में “हमारा अपना दो-मंज़िला घर है”

11 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

अथ कोई अलसकथा नहीं! रविवार के उस दुपहर-उष्ण में ऊँघने के स्वाँग में तुम्हारी पीठ पर श्वासों की सुदीर्घ कविताओं का पाठ नहीं कर सका, खमा करो। मुझे एक नए आरंभ की पहली सीढ़ी पर पाँव धरने थे। अभी कितना

04 अप्रैल 2026

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

20 जुलाई 2022 अदीब अचानक नींद से उठ बैठा। किसी ऊबड़-खाबड़ सपने की वजह से शायद। कुछ क्षण बाद ठीक से उसकी चेतना लौटी तो उसको लगा कि वह अकेला नहीं सो रहा है, कमरे में चैतन्या की यादें भी सो रही हैं। इस

22 फरवरी 2026

प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा

प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा

मेरानो, 15 जून 1920 मंगलवार इस अलस्सुबह मैंने फिर तुम्हें स्वप्न में देखा। हम साथ बैठे थे और तुम मुझे दूर कर रही थीं—ग़ुस्से से नहीं, सहज आत्मीयता से। मैं बेहद दुखी था। इसलिए नहीं कि तुम मुझे दूर

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।

14 फरवरी 2026

‘तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ’

‘तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ’

दूर तक फैले कीकर और बबूल के पेड़ों के बीच कच्ची पगडंडी पर सीताफल के दो पेड़ थे। उसी कच्ची पगडंडी पर चलते हुए ज़रा पीछे की ओर गरदन मोड़ लो तो सरकारी स्कूल का फाटक दिखने लगता था। लड़का-लड़की छुट्टी के

31 जनवरी 2026

चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...

चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...

मॉस्को, 1886 …तुम मुझसे अक्सर शिकायत करते रहे हो कि लोग तुम्हें “समझते” नहीं हैं! गेटे और न्यूटन ने कभी ऐसी शिकायत नहीं की थी... मसीह ने इसकी शिकायत की थी, लेकिन वह अपने सिद्धांत की बात कर रहे थे,

05 नवम्बर 2025

विकुशु के नाम एक पत्र

विकुशु के नाम एक पत्र

प्रिय विनोद कुमार शुक्ल जी, आपको मेरा सादर प्रणाम! मैंने जब ‘हिंद युग्म’ महोत्सव (रायपुर) में आपको पहली बार देखा और आपसे मिली तो मेरे मन में पहले जो भी भ्रांतियों के बादल घिरे थे, सब छँट गए। सो

08 जून 2025

प्रेत के पत्र

प्रेत के पत्र

तुम्हारे जाने के सोलह दिन बाद... डियर जिता, हम कुछ भी हो सकते थे। हम स्कूल से साथ निकलकर अपने-अपने घर जाते हुए थोड़ा-सा बचे रह सकते थे—एक दूसरे के पास! हम उस पहले झगड़े के शब्द बन सकते थे जो हमार

02 जून 2025

'संगत'-प्रसंग : पक्ष और प्रमाण

'संगत'-प्रसंग : पक्ष और प्रमाण

‘संगत’—‘हिन्दवी’ का प्रमुख कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत हिंदी साहित्य संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों के वीडियो-साक्षात्कार ‘हिन्दवी’ के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किए जाते हैं। इस सिलसिले में 23 मई 2

03 मई 2025

चिट्ठीरसा : कुछ परंपराओं का होना, जीवन का होना होता है

चिट्ठीरसा : कुछ परंपराओं का होना, जीवन का होना होता है

डाकिया आया है। चिट्ठी लाया है। ये शब्द अम्मा को चुभते थे। कहतीं चिट्ठीरसा आए हैं, बड़ी फुर्ती से उस दिन ओसारे से दुआर तक पहुँचतीं, जैसे कोई किसी अपने का इंतिज़ार करते माला जप रहा हो, और ईश्वर ने उसकी

31 दिसम्बर 2024

...इस साल का आख़िरी ख़त

...इस साल का आख़िरी ख़त

एमजे के लिए इस साल का आख़िरी ख़त एक बीत गए में कुछ जोड़ना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल है उसे याद करना। एक ताख़े पर कुछ किताबें जुड़ जाती हैं, जैसे उनका कुछ ख़ुद से जुड़ जाता है। एक मन होत

25 सितम्बर 2024

क्या मिट्टी के आस-पास ‘मिट्टी न होने का’ कोई माध्यम नहीं हो सकता

25 सितम्बर 2024

क्या मिट्टी के आस-पास ‘मिट्टी न होने का’ कोई माध्यम नहीं हो सकता

प्रिय पांडू, तुम्हारे पत्र बहुत मज़ेदार होते हैं, लेकिन फ़ोन पर तुम्हारी भारी-भरकम गंभीर आवाज़ सुनकर मुझे लगता है जैसे अपने ग़ुस्सैल और असंतुष्ट अंकल से बात कर रहा हूँ। आवाज़ कानों को तो अच्छी लगत

12 अगस्त 2024

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए कुछ लेखकों और चित्रकारों ने कविताएँ लिखी थीं। वे सारी कविताएँ और कुछ पत्र ‘द गोल्डन बुक ऑफ़ टैगोर’ में प्रकाशित की गई थीं। यह किताब 1931 में राममोहन पुस्तकालय, कलकत्ता से छपी

29 मई 2024

सआदत हसन मंटो के नाम

सआदत हसन मंटो के नाम

सरहद, भारत-पाकिस्तान 2024 मंटो, पहले अज़ीज़ लिखूँ या आदाब, यहीं मात खा गया। ज़ाहिर है प्रोज़ में आपका मुक़ाबला कर पाना, मेरे बस के और बस के कंडक्टर के—दोनों के बाहर है। आज आपकी सालगिरह है। आपको जा

10 मई 2024

वालिद के नाम एक ख़त

वालिद के नाम एक ख़त

प्यारे अब्बा! मैं जानता हूँ कि मैं इस तहरीर के पहले लफ़्ज़ को आपको पुकारने के लिए इस्तेमाल करने के लायक़ नहीं हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि मैंने होश सँभालने से लेकर अब तक आपको सिर्फ़ दुख पहुँचाया ह