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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

01 दिसम्बर 2024

‘हिंदुस्तान आपको नींद की ज़रूरत है’

‘हिंदुस्तान आपको नींद की ज़रूरत है’

मेरे प्यारे दोस्तो, हिंदुस्तान कभी सुबह जल्दी उठने वालों का देश हुआ करता था। यह हमारे डीएनए में था। सुबह उठकर आप बिना किसी रुकावट के दस क़दम भी नहीं चलते कि एक आत्ममुग्ध चाचा जी मिल जाते, जो सुबह 4 बज

28 नवम्बर 2024

'गंध ही के भारन बहत मंद-मंद पौन...'

'गंध ही के भारन बहत मंद-मंद पौन...'

वसंत इस कामकाजी शहर का मूड नहीं है। संभवतः जनवरी के बाद ही गर्मियों की तैयारी में यह शहर फ़रवरी के मूड को स्किप कर देता है। इस बीच वसंत का आना भी महज़ हवा में कपूर की तरह ही होता है। उदास बयार की छुअन

25 नवम्बर 2024

दिल्ली के धड़कते दिल से गुज़रते हुए

दिल्ली के धड़कते दिल से गुज़रते हुए

किसी शहर का मुस्लिम इलाक़ा उस शहर की धड़कती हुई जगहों में से एक होता है, जहाँ आला दर्ज़े के शायरों, बावरचियों, हकीमों, दानिशमंदों, इबादतगुज़ारों से लेकर हर तरह के काम-धंधे वाले लोग मिलेंगे। चावड़ी बा

14 नवम्बर 2024

नीत्शे के नीत्शे होने की कहानी

नीत्शे के नीत्शे होने की कहानी

“किधर है नीत्शे?”  यह सवाल सुबह से नीत्शे के घर में गूँजता रहता। उसके पिता बोहरे जी, जिनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा है—और जो गाँव के पुजारी और ज्योतिषाचार्य हैं—जो सुबह-सुबह अपने बेटे के घर स

12 नवम्बर 2024

ज़िंदगी से ग़ायब आमों की महक

ज़िंदगी से ग़ायब आमों की महक

बारिश में पेड़ से टपका आम गद्द से ज़मीन में धँस जाए, आगे-पीछे मिट्टी में लिपटे हम, मिट्टी में छिपे आम को खोजने में मिट्टी में इधर-उधर झपट्टा मारते हुए; आम खोजते और बाल्टी, बोरा और खाँची सब भर डालते। 

10 नवम्बर 2024

कवि बनने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप लिखें

कवि बनने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप लिखें

‘बीटनिक’, ‘भूखी पीढ़ी’ और ‘अकविता’ क्या है, यह पहचानता हूँ, और क्यों है, यह समझता हूँ। इससे आगे उनपर विचार करना आवश्यक नहीं है। — अज्ञेय बीट कविता ने अमेरिकी साहित्य की भाषा को एक नया संस्कार दि

03 नवम्बर 2024

जीवन के मायाजाल में फँसी मछली

जीवन के मायाजाल में फँसी मछली

पेंगुइन बर्फ़ की कोख में नवजात पेंगुइन पैदा हुआ। पेंगुइन नहीं जानता था, वह क्यों और किस तरह पैदा हुआ। कौन-से उद्देश्य की ज़र खाई पाज़ेब पहन अपने पाँव ‌ज़मीन पर रखे। यह रूप, यह संज्ञा, यह संसार, यह

01 नवम्बर 2024

जब कहानी पाठक को किरदार बना ले

जब कहानी पाठक को किरदार बना ले

साहित्य कोई महासागर है, कहानी उसमें बहने वाली धारा—शीत भी, उष्ण भी। वहीं से निकलती है, वहीं समा जाती है। सदियों से यह क्रम चल रहा है। धर्म और लोक रंग में रंगी हुई कथाएँ भी कही-सुनी जाती रही हैं। कहान

30 अक्तूबर 2024

कनॉट प्लेस के एक रेस्तराँ में एक रोज़

कनॉट प्लेस के एक रेस्तराँ में एक रोज़

उस दिन दुपहर निरुद्देश्य भटकते हुए, मैंने पाया कि मैं कनॉट प्लेस में हूँ और मुझे भूख लगी है। सामने एक नया बना रेस्तराँ था। मैं भीतर चलता गया और एक ख़ाली मेज़ पर बैठ गया। मैंने एक प्यारी-सी ख़ुशी महसूस

27 अक्तूबर 2024

मोहब्बत की फ़ेहरिस्त से ग़ायब मुमताज़-शाहजहाँ

मोहब्बत की फ़ेहरिस्त से ग़ायब मुमताज़-शाहजहाँ

ताजमहल के दीदार की मेरी कभी ख़्वाहिश ही नहीं हुई। इसमें ताजमहल की कोई ख़ता भी नहीं, बस हालात ज़रा ज़ालिम बनते गए और जब भी ताज का ज़िक्र आया तो मुँह का ज़ायक़ा कसैला हो गया। ज़िंदगी की पहली पारी का शुरुआती