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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

06 अप्रैल 2025

‘क्या एडम और ईव ब्लैक थे?’

‘क्या एडम और ईव ब्लैक थे?’

‘क्या एडम और ईव ब्लैक थे?’ इन सात शब्दों का गल्प और यथार्थ से गहरा संबंध है और इसे मैं वैसे ही साबित करूँगा जैसे नौंवी कक्षा में हमसे यह सिद्ध करवाया जाता था कि √2 (रूट टू) एक अपरिमेय (Irrational)

05 अप्रैल 2025

शोक स्थायी है

शोक स्थायी है

मैं कितना अपढ़ और अहंकारी हुआ जाता हूँ, इसका भान भी पढ़ने और जीने से ही आता है। आजकल ऐसा लगता है कि मैं अपने आप को ही पसंद नहीं आ रहा हूँ। जीवन की अपनी मुश्किलें हैं और आपसे सबकी अपेक्षाएँ भी,

03 अप्रैल 2025

दास्तान-ए-गुरुज्जीस

दास्तान-ए-गुरुज्जीस

एम.ए. (दूसरे साल) के किसी सेमेस्टर में पाठ्यक्रम में ‘श्रीरामचरितमानस’ पढ़नी थी। अब संबंध ऐसे घर से था—जहाँ ‘श्रीरामचरितमानस’ और ‘श्रीदुर्गासप्तशती’ पूजा-पाठ के क्रम में पढ़ने के साथ ही, बुज़ुर्गों द

02 अप्रैल 2025

कहानी यहाँ से शुरू होती है

कहानी यहाँ से शुरू होती है

‘‘सलाम करके गुज़रता था जिस मज़ार को मैं’’ उसने काग़ज़ पर ये मिसरा लिखा और शाइर का नाम सोचने लगा। कुछ देर बाद उसने ये वाक्य : ‘‘अंत ही आरंभ है…’’ लिखा और काट दिया। फिर एक लंबी बुत-नुमाई के बाद कुफ़्र

29 मार्च 2025

तेरह दिन की एक आत्मकथा

तेरह दिन की एक आत्मकथा

रहना यहीं था—इसी समाज में, घर के भीतर, घर के बाहर। घर भीतर ढूँढ़ते हुए अब, सब इधर-उधर था। कोई याद अपनी जगह पर नहीं मिल रही है इस जगह। अभी तो रहना है, यह सोचकर यादों को तरतीब देने का मन बना लिया।

26 मार्च 2025

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

साल 2006 में प्रकाशित ‘एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी की प्रसिद्ध आत्मकथा है, लेकिन मन्नू भंडारी इसे आत्मकथा नहीं मानती थीं। वह अपनी आत्मकथा के स्पष्टीकरण में स्पष्ट तौर पर लिखती हैं—‘‘यह मेरी आत्मकथा

24 मार्च 2025

नदी, लोग और कविताएँ

नदी, लोग और कविताएँ

दिन के बाद दिन आते गए और रात के बाद रात। सारा जीवन इकसार और नीरस-सा लगने लगा। इस दुख को हँसकर टालने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी न था। रात के अकेलेपन को काटने के लिए फ़ोन की स्क्रीन को बेहिसाब स्क्रॉ

22 मार्च 2025

मार्सेल प्रूस्त : स्मृति का गद्यकार

मार्सेल प्रूस्त : स्मृति का गद्यकार

“…ख़ैर, प्रूस्त के बाद लिखने के लिए क्या ही बचता है!” (Virginia Woolf, Letters, Vol-2) वर्जीनिया वुल्फ़ की यह टिप्पणी, मानव चेतना, स्मृति और समय के बारे में मार्सेल प्रूस्त के लेखन की उस सिफ़त को रे

20 मार्च 2025

मेरे पुरखे कहाँ से आए!

मेरे पुरखे कहाँ से आए!

गोलू का कॉल आया। उसने कहा कि चाचा मिलते हैं। “कहाँ मिलें?” “यमुना बोट क्लब।” वह मेरा भतीजा है। वह यमुना पार महेवा नैनी में रहता था। हम अपने-अपने रास्ते से होते हुए पहुँच गए यमुना बोट क्लब। उ

18 मार्च 2025

कहानी : स्मृतियों की गर्म भाप में सीझता मन

कहानी : स्मृतियों की गर्म भाप में सीझता मन

मुझे ऐसे गले लगाओ जैसे मैं कल मरने वाला हूँ, और कल मुझे ऐसे गले लगाओ जैसे मैं मृतकों में से वापस आया हूँ! —निज़ार क़ब्बानी “Who can forget the most amazing moment when we get face to face for t