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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

06 अगस्त 2024

‘मुझे यक़ीन है कि अब वह कभी लौटकर नहीं आएँगे’

‘मुझे यक़ीन है कि अब वह कभी लौटकर नहीं आएँगे’

तड़के तीन से साढ़े तीन बजे के बीच वह मेरे कमरे पर दस्तक देते, जिसमें भीतर से सिटकनी लगी होती थी। वह मेरा नाम पुकारते, बल्कि फुसफुसाते। कुछ देर तक मैं ऐसे दिखावा करता, मानो मुझे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा हो।

05 अगस्त 2024

मैं जब चाहे बाल नहीं धो सकती

मैं जब चाहे बाल नहीं धो सकती

“आज बाल नहीं धोने हैं।” “क्यों?” “आज एकादशी है।” “पर बाबा तो अभी-अभी शैंपू करके निकले हैं।” “तुमसे तो बात ही करना बेकार है। चार किताब पढ़ के आज के लैकन तेज हो जाई त ह थ...”   औरतों का ब

03 अगस्त 2024

बुद्धिजीवी और गधे

बुद्धिजीवी और गधे

बुद्धिजीवियों ने अपना वाहन नहीं बदला। आज भी गधे उनके पसंदीदा वाहन हैं। ...एक गधे को दूसरे गधे से बहुत ईर्ष्या होती है।                                                        बुद्धिजीवी कभी घोड़े क

02 अगस्त 2024

दिल्ली नायकों की आस में जीती है और उन्हीं की सताई हुई है

दिल्ली नायकों की आस में जीती है और उन्हीं की सताई हुई है

जिस तरह निर्मल वर्मा की सभी कृतियाँ बार-बार ‘वे दिन’ हो जाती हैं, कुछ उसी तरह मुझे भी इलाहाबाद के वे दिन याद आते हैं। — ज्ञानरंजन एक ...और मुझे दिल्ली के ‘वे दिन’ याद आते हैं, और बेतरतीब याद

31 जुलाई 2024

प्रेमचंदजी के साथ दो दिन

प्रेमचंदजी के साथ दो दिन

“आप आ रहे हैं, बड़ी ख़ुशी हुई। अवश्य आइए। आपसे न-जाने कितनी बातें करनी हैं। मेरे मकान का पता है— बेनिया-बाग़ में तालाब के किनारे लाल मकान। किसी इक्केवाले से कहिए, वह आपको बेनिया-पार्क पहुँचा देगा

24 जुलाई 2024

शिमला डायरी : काई इस शहर की सबसे आदिम पहचान है

शिमला डायरी : काई इस शहर की सबसे आदिम पहचान है

10 जुलाई 2024 सुशील जी का घर, मुखर्जी नगर। नेताजी एक्सप्रेस लेट है। उनके साथ खाना खाता हूँ। वह टिफ़िन बाँध देते हैं। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उमस। स्लीपर में बीच वाली सीट। ले गर्मी, दे गर्मी।

22 जुलाई 2024

राग गांधी मल्हार वाया तीस जनवरी मार्ग

राग गांधी मल्हार वाया तीस जनवरी मार्ग

वह मुख—अरे, वह मुख, वे गांधी जी!! — मुक्तिबोध दुर्घटनाग्रस्त सड़कों, जननायक-रिहाई-केंद्रित धरना-प्रदर्शनों के बीच (कु)भाषणों और पाँच वर्षों में एक बार आने वाले लोकतंत्र के महापर्व की उत्सवधर्मि

19 जुलाई 2024

क़ुबूलनामा : एक ड्रग पैडलर का

क़ुबूलनामा : एक ड्रग पैडलर का

डिस्क्लेमर :  यहाँ प्रस्तुत लेख में वर्णित सभी पात्र, कहानियाँ, घटनाएँ और स्थान काल्पनिक हैं; जो किसी भी व्यक्ति, समूह, समाज, सरकारी-ग़ैरसरकारी संगठन और अधिकारियों से कोई संबंध नहीं रखते हैं। यह ल

18 जुलाई 2024

एक कोरोजीवी का ख़ुद को ख़त

एक कोरोजीवी का ख़ुद को ख़त

प्रिय ‘मैं’ घड़ी के अश्रांत पाँव मुझे हमेशा रोचक लगे हैं। उनके आगे चलते जाने की प्रतिबद्धता मुझे हैरत और हिम्मत से सराबोर करती है। तुम्हें पता है कि मेरी हमेशा से यह अकारथ इच्छा रही है—जो कि संभवतः

17 जुलाई 2024

जेएनयू क्लासरूम के क़िस्से-5

जेएनयू क्लासरूम के क़िस्से-5

जेएनयू क्लासरूम के क़िस्सों की यह पाँचवीं कड़ी है। पहली, तीसरी और चौथी कड़ी में हमने प्रोफ़ेसर्स के नामों को यथावत् रखा था और छात्रों के नाम बदल दिए थे। दूसरी कड़ी में प्रोफ़ेसर्स और छात्र दोनों पक्षों के