Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

15 अक्तूबर 2026

‘कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…’

‘कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…’

एक समय था जब मैं केवल एक फूल था किसी सरोवर का। मैं उस दिन सबसे अधिक प्रसन्न था, जिस दिन मेरा कोई नाम नहीं था। सूरज का प्रकाश मेरे ऊपर उतरता था, जल मुझे अपनी गोद में थामे रहता था और ओस की बूँदें आसमान

13 अक्तूबर 2026

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

प्यारेलाल जी पधारे। प्रसन्नता नहीं हुई, कोफ़्त हुई। तंगदिल नहीं हूँ, संगदिल भी नहीं। आगंतुक को समय-कुसमय का ख़याल रखना चाहिए। उनके जैसा कुँवारा तो नहीं हूँ; बाल-बच्चेदार हूँ, नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। स

12 अक्तूबर 2026

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

गदहे को इंसानी समाज ने हमेशा से ही तुच्छ प्राणी समझा है। इसीलिए प्राणी संग्रहालय में गदहे को छोड़कर सब प्राणियों को रखा गया। क्या गदहों को इंसानों की इस हरकत का बुरा नहीं लगता होगा? गदहा हमेशा से

12 अक्तूबर 2026

नाना पाटेकर : असा नटसम्राट पुन्हा होण नाहि

नाना पाटेकर : असा नटसम्राट पुन्हा होण नाहि

जब कोई कलाकार यथार्थ और स्वप्न में भेद ख़त्म करके जीने लगता है तो उसका कहीं कोई घर नहीं होता, कोई ठिकाना, कोई निवास नहीं। न बाहर और न ही भीतर। वह दोनों जगह से विस्थापित है। वह हर जगह से विस्थापित है।

12 अक्तूबर 2026

मैं असह्य होना चाहती हूँ : ऐन कार्सन और उनकी रचना-प्रक्रिया

मैं असह्य होना चाहती हूँ : ऐन कार्सन और उनकी रचना-प्रक्रिया

मेरी निजी कविता एक विफलता है मैं कोई व्यक्ति नहीं होना चाहती  मैं असह्य होना चाहती हूँ [Stanzas, Sexes, Seduction] जीवन अपने मूल रूप में असहनीय है। मनुष्य की जटिलताएँ, उसके तमाम अनुभव और निर्

10 अक्तूबर 2026

तर्पण से पहले समर्पण

तर्पण से पहले समर्पण

यह शीर्षक शायद आपको असहज कर सकता है, इसलिए शुरुआत में ही स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि यह आलेख हमारी सनातन परंपरा और श्राद्ध-कर्म के विरोध में क़तई नहीं है। मैं एक संभ्रांत पंडित परिवार से संबंध रखती ह

09 अक्तूबर 2026

यह देश कैसे बच सकता है?

यह देश कैसे बच सकता है?

जब लोग मेरी और राहुल गांधी की मैच्योर न होने की समस्या को समस्या मानना बंद कर दें। झूठ बोलने के लिए सच याद रखना पड़े और व्यंजना की व्याख्या करने की ज़रूरत न पड़े। जब मैं कहूँ कि मेरी बात का बुरा मत म

07 अक्तूबर 2026

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

हर साल अक्टूबर आते ही एक अलग बयार चलने लगती है। शिउली के फूल खिलते हैं। रावण जलते हैं। नोबेल मिलते हैं। नवंबर में दिसंबर आने की भड़भड़ भरी रहती है। अक्टूबर चौदहवीं का चाँद है। यानी तनिक गुंजाइश है—गत

06 अक्तूबर 2026

रामलीला : जब देवराज ने रोका लंकाधिपति का रास्ता

रामलीला : जब देवराज ने रोका लंकाधिपति का रास्ता

लॉकडाउन के बाद पूरे देश ने कोरोना वायरस की क़ैद से निकलकर खुली हवा में साँस लेना शुरू ही किया था। सड़कों पर फिर से गाड़ियाँ दौड़ने लगी थीं, लोगों में बिना डर और हिचक के एक-दूसरे से one-arm distance क

03 अक्तूबर 2026

प्रस्तुत नहीं : अकेलापन कोई चुनता नहीं, वह दे दिया जाता है

03 अक्तूबर 2026

प्रस्तुत नहीं : अकेलापन कोई चुनता नहीं, वह दे दिया जाता है

कितना कुछ घट रहा है। दुनिया में, देश में, मुझ में। बहुत उलझन में हूँ। बहुत सारी बातें एक साथ सोच रहा हूँ। अपने मस्तिष्क में हर चीज़ का, हर स्थिति का हिसाब लगाने की कोशिश करता हुआ—घर के एक कोने से दूस