साहित्य और संस्कृति की घड़ी
पुराने शहर के पुराने इलाहाबादियों के पास थोक के भाव में नेहरू-गांधी ख़ानदान के क़िस्से हैं—जैसे-जैसे गंगा खिसककर यमुना के पास जाती रही, ठीक वैसे ही इलाहाबादियों ने इन गुज़रे क़िस्सों में स्वादानुसार न
12 अगस्त 2026
आज 12 अगस्त है। छह साल पहले कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी ने न्यूज़ डिबेट के दौरान आए हार्ट अटैक में अपनी जान गँवा दी थी। कम से कम उनके डॉक्टर ने तो यही कहा था। हर साल उनकी याद आती है। इस बार याद
11 अगस्त 2026
गताध्याय से आगे... सात भावुकता दुर्गण नहीं है, मनुष्य होने की उच्च अवस्था है। भावुक व्यक्तियों ने ही सच्चा प्रेम किया है। समाज में करुणा का प्रसार किया है। मनुष्यता की रक्षा की है। देश के लिए
संबंधों के बिना मानव जीवन कितना शांत और सरल है। लेकिन ऐसी शांति और सरलता किस काम की जिसमें मानव किसी से दो बातें न कह सके। किसी के ऊपर चिल्ला न सके। उससे झगड़ न सके। झापड़ न मार सके या बदले में उससे झा
‘तय’—हिंदी कहानी की स्थापित व्याख्या से परे जाती है। ‘तय’ के बारे में तय नहीं है कि यह एक परीकथा है या फ़ैंटेसी। इसमें अंतश्चेतना के प्रवाह की तकनीक का सूक्ष्म प्रयोग हुआ है। कहानी में नायक और नायिका
सजा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच, नॉर्वे अपने यहाँ की जेलों को एक ऐसे सामाजिक प्रयोग में बदल रहा है, जो न्याय की वैश्विक धारणाओं को चुनौती देता है। दक्षिणी ओस्लो के एक छोटे से द्वीप पर क़ैदी अपने द
04 अगस्त 2026
गताध्याय से आगे... छह गंज गोबरहवा में मोनालिसा की मुस्कान को कोई नहीं जानता था। लेखक भी इस शहर में इन्हीं कोई का हिस्सा थे, उनका कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं था। वे गंज गोबरहवा विश्वविद्यालय क
सोनम वांगचुक का अनशन उस लंबी भारतीय परंपरा की ताज़ा कड़ी था, जिसमें देह को दाँव पर रखकर सत्ता से संवाद माँगा गया। लेकिन जिस दौर में उपवास इंस्टाग्राम स्टोरी है और तपस्या प्रेस-रिलीज़ की शब्दावली, वहा
01 अगस्त 2026
खिड़की के सीखचों पर फड़फड़ाते हुए कबूतर आकर बैठते हैं और फिर उड़ जाते हैं। यह जोधपुर में अप्रैल-2019 की एक दुपहर है—इतनी गर्म कि पीठ में काँटे चुभ रहे हों जैसे। मेरा एक दोस्त मुझे शहर की पतली गलिय
31 जुलाई 2026
जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हुई है। यों, आने वाले लेखक का मस्तक राख से साँवला है। पानी, पसीने या ख़ून से धुलकर