Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

अश्वघोष

80 AD - 150 AD | अयोध्या, उत्तर प्रदेश

अश्वघोष के उद्धरण

अतिथि कैसा भी हो, उसका आतिथ्य करना श्रेष्ठ धर्म है।

दुखों में अज्ञान-दुःख सबसे बड़ा दुःख है।

दुःख के प्रतिकार से थोड़ा दुःख रहने पर भी मनुष्य सुख की कल्पना कर लेता है।

इस प्रकार संसार में धन पाकर जो लोग उसे मित्रों और धर्म में लगाते हैं, उनके धन सारवान हैं, नष्ट होने पर अंत में वे धन ताप नहीं पैदा करते।

Recitation