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जीवन पर ग़ज़लें

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

आँख उनकर आज

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी जानवर बन

ए. कुमार ‘आँसू’

जेने उनकर नजर

कृष्णानन्द कृष्ण

गीली केहिकै कोर

अशोक अज्ञानी

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

कबो झील तितली

जौहर शफियाबादी

जिन्दगी के सुख

ए. कुमार ‘आँसू’

कब छाँही कब

अशोक अज्ञानी

आज अदिमी बिखर

ए. कुमार ‘आँसू’

का रखल बा अब

कृष्णानन्द कृष्ण

तहरा सुधियन के

अशोक द्विवेदी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

नाँव लिख-लिख के मिटावत

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

ना सुने के

गहबर गोवर्द्धन

एकहू बून पानी घटा

गहबर गोवर्द्धन

उमिर के सँवारत

कृष्णानन्द कृष्ण

बेवफा एह जिन्दगी

कृष्णानन्द कृष्ण

हवा में बा

जगन्नाथ

पाँव कतनो जरी

गहबर गोवर्द्धन

आ रहल बेसम्हार पानी फिर

तैयब हुसैन पीड़ित

जिनगी के रंग

जौहर शफियाबादी

कहाँ अन्हरिया के

मिथिलेश ‘गहमरी’

हमरा हालात से

तैयब हुसैन पीड़ित

जिनगी पहाड़ भेल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

झूठा सब वरदान भइल बा

ब्रजभूषण मिश्र

केहू न पास बा

ब्रजभूषण मिश्र

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

हमरा जिनगी में भोर

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

पतझर जब से पास भइल

रमाकान्त मुकुल

के बा आपन, कवन पराया

ब्रजभूषण मिश्र

ऊखम से फूल

जौहर शफियाबादी

चुप्पी मारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

झलकेले खुशी बीच

अशोक द्विवेदी