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होर्खे लुई बोर्खेस

1899 - 1986 | अर्जेंटीना

वि-लेखक- विचारक होर्खे लुई बोर्खेस स्पेनिश भाषा के महानतम लेखकों में शुमार।पिछली शताब्दी के तीसरे दशक में स्पानी-लातिनी अमरीकी कविता में अवाँगार्द-आन्दोलन के एक प्रेरक कवि।

वि-लेखक- विचारक होर्खे लुई बोर्खेस स्पेनिश भाषा के महानतम लेखकों में शुमार।पिछली शताब्दी के तीसरे दशक में स्पानी-लातिनी अमरीकी कविता में अवाँगार्द-आन्दोलन के एक प्रेरक कवि।

होर्खे लुई बोर्खेस के उद्धरण

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बहुत पहले ही मैं यह समझ गया था कि इस पृथ्वी पर ऐसी कोई चीज़ नहीं है, जिसमें संभावित नर्क के बीज हों; एक चेहरा, एक शब्द, एक कम्पास या एक सिगरेट का विज्ञापन, जैसी चीज़ें मनुष्य को पागल बनाने में सक्षम हैं; अगर वह उन्हें भूल नहीं पाए।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मेरी देह को भय होगा, मुझे नहीं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

  • संबंधित विषय : देह

टेनिसन ने एक बार कहा था कि अगर हम एक फूल को भी समझ सकें, हम यह जान सकेंगे कि हम कौन हैं और यह विश्व क्या है। शायद वह यह कहना चाहते थे कि ऐसा कोई तथ्य नहीं है, चाहे कितना ही महत्त्वहीन क्यों हो, जो ख़ुद में ब्रह्मांडीय इतिहास समेटे हो और कारण प्रभाव की अंतहीन कड़ियाँ जोड़ता हो। शायद वह यह कहना चाहते हों कि दृश्य विश्व सारे लक्षणों में अंतर्निहित है, जैसा कि शोपेनहावर कहते हैं कि इच्छा सारी विषयवस्तु में अंतर्निहित है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

अगर कविता का उद्देश्य आश्चर्यचकित करना हो तो इसका जीवन-काल शताब्दियों में नहीं मापा जाएगा, बल्कि दिनों और घंटों में मापा जाएगा या शायद मिनटों में मापा जाए।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

दुष्ट नहीं होना एक शैतानी घमंड है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

ऐसे भी लोग हैं जो स्त्री के प्रेम की इच्छा रखते हैं ताकि उसे भूल सकें, ताकि उसका ख़याल उनके मन में और आए।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

दर्पण और संभोग घिनौने होते हैं, क्योंकि वे मनुष्यों की संख्या में वृद्धि करते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

यह घर संसार जितना बड़ा है या यूँ कहें कि यही संसार है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

किसी धर्म के लिए मृत्यु का वरण करना उसके लिए जीने से कहीं अधिक आसान है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

जब मैं युवा था : मैं सूर्यास्त, झोपड़पट्टियों और दुर्भाग्य की ओर आकर्षित होता था और अब मैं शहर के बीचोंबीच की सुबह और शांति की ओर आकर्षित होता हूँ। अब मैं हैमलेट नहीं बनता।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मृत्यु (या उसका भ्रम) मनुष्य को मूल्यवान और दयनीय बनाता है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

एक कविता तब महानता अर्जित करती है : जब हमें उसमें हमारी इच्छाओं, चाहतों को शब्द मिल रहे होते हैं; कि जब वह किसी घटना का दृष्टांत कर रही हो।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मैं जिन शब्दों को बोलते हुए उठा वे मुझे समझ नहीं आए। वे शब्द कविता थे।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

सही मायनों में किसी चीज़ को देखने के लिए पहले उसे समझना होगा। अगर हम विश्व को सही मायनों में देख पाते तो शायद उसे समझ भी पाते।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

जब अंत आता है तब दृश्यों की स्मृति नहीं बचती, सिर्फ़ शब्द बचते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

जब मनुष्य एक निश्चित उम्र में पहुँच जाता है तो वह किसी भी चीज़ का दिखावा कर सकता है, लेकिन प्रसन्नता का नहीं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

सारे लेखक आज नहीं तो कल अपने ख़ुद के सबसे बुद्धू शिष्य बनकर रह जाते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

यह तथ्य है कि सभी लेखक अपने पूर्ववर्तियों की सृष्टि करते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

स्वर्ग अस्तित्वमान रहे, भले ही हमारी जगह नर्क में हो।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

सारे रास्ते व्यर्थ थे, सारे रास्ते मुझे शेक्सपियर की तऱफ ले जाते थे।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

शब्द संकेत चिह्न हैं जो साझा स्मृतियों को बयान करते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मनुष्य नवीनता और रेगिस्तान से घृणा करता है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

आप, जो मेरा लिखा पढ़ रहे हैं, क्या आप निश्चित हैं कि आप मेरी भाषा समझते हैं?

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

हम यथार्थ को आसानी से स्वीकार शायद इसलिए कर पाते हैं कि क्योंकि हम जानते हैं कि कुछ भी वास्तविक नहीं है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

विश्व की यांत्रिकी जानवर की सरलता के आगे काफ़ी जटिल है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

प्रसिद्धि नासमझी है या शायद उससे भी बुरी चीज़।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मैं उस घटना का ‘मैं’ नहीं हूँ; फिर भी शायद मुझे याद हो क्या हुआ था वहाँ, शायद मैं बयान भी कर सकूँ। मैं फिर भी, अधूरा बोर्हेस हूँ।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

मैं ही होमर था; कुछ देर में मैं कोई नहीं हो जाऊँगा, यूलिसिस की तरह; कुछ देर में मैं समस्त मनुष्य हो जाऊँगा; मैं मर जाऊँगा।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

संभव है कि ब्रह्मांड का इतिहास कुछ चुनिंदा रूपकों का इतिहास हो।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

हमारे लिए कुछ और नहीं सिर्फ़ उद्धरण बचे हैं। हमारी भाषा उद्धरणों का एक तंत्र है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

वे सभी मनुष्य जो शेक्सपियर के साहित्य से एक भी पंक्ति दुहराते हैं, शेक्सपियर हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

प्रकृति अंतहीन है जिसका केंद्र हर जगह है और जिसकी परिधि कहीं नहीं है।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

समय बीतने के साथ लोग अपने शत्रुओं जैसे हो जाते हैं।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

  • संबंधित विषय : समय

किसी की प्रशंसा या विरोध में लिखा हुआ ही किसी को आहत करता है और ही इनसे कोई क्षति पहुँचती है। मनुष्य अपने ख़ुद के लिखे से पूर्ण या अपूर्ण हो सकता है, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसके बारे में कही गई बातों से नहीं।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

संगीत, संवेदनाएं, पौराणिक कथाएँ, समय के साथ ढ़ल चुके चेहरे और कुछ जगहें हमें कुछ बताना चाहते हैं, या हमें कुछ बता रहे हैं जिनसे हमें चूकना नहीं चाहिए था या वे हमसे कुछ कहने वाले हैं, एक रहस्य का बहुत क़रीब से प्रकट होना, जिसे बनाया नहीं, जो शायद एक सुन्दर घटना है।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

कला हमेशा मनुष्य का चुनाव करती है, जो मूर्त है, कला सैधान्त्तिक नहीं होती।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

सोचना भूलना है किसी अंतर का, विचार करने का अर्थ है एक अंतर को भूल जाना, चीज़ों का सामान्यीकरण करना, अमूर्त करना।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

सच तो ये है कि हम सब बहुत कुछ पीछे छोड़ कर जीते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि हम समझते हैं कि यह जीवन अनंत है। कभी कभी हर मनुष्य सभी अनुभवों से गुजरेंगे।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

कभी कभी घर पर रखी बहुत सारी किताबों को देख कर मुझे महसूस होता है कि इससे पहले कि मैं हर क़िताब तक पहुँचू मैं इस दुनिया से चला जाऊंगा, लेकिन फिर भी नई क़िताबों को खरीदने का उत्साह मेरा कम नहीं होता। जब भी मैं किसी बुक स्टोर पर जाता हूँ और मुझे वहाँ मेरी पसंद की कोई क़िताब दिख जाती है तो मैं ख़ुद से यह बात कहता हूँ कि यह कितने दुःख की बात है कि मैं यह क़िताब ले नहीं सकता क्योंकी मेरे पास उसकी एक प्रति पहले से है।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

मैंने जो भी लिखा है उसे दोबारा कभी नहीं पढ़ा। मैंने जो भी किया है उसके लिए मुझे डर है कि मैं शर्मिंदगी महसूस करूँ।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

जिस तरह से तुम डॉलर और सेंट्स की माप करते हो उसी तरह से तुम समय को दिनों में माप नहीं सकते, क्योंकी डॉलर हर दिन एक जैसे होते हैं लेकिन हर दिन अलग होता है, हर पल अलग।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

  • संबंधित विषय : समय

दो सपनों की कहानी एक संयोग है, संयोग से खिंची गई एक रेखा, जैसे बादलों में बनती हैं घोड़े और शेर की आकृतियाँ।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

कई बार पढ़ने के अलावा, पढ़ना भी महत्वपूर्ण है।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

एक लेखक की शुरुआत हमेशा बहुत जटिल होती है - वह कई खेल एक साथ खेल रहा होता है।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

  • संबंधित विषय : कवि

अरस्तू आदम का अवशेष थे और एथेंस स्वर्ग का भग्नावशेष।

अनुवाद : आदित्य शुक्ल

ये काफ़ी है कि अगर मैं किसी चीज़ का धनी हूँ तो वह उलझनें हैं, की निश्चिन्त्ताएं।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

मैं ऐसा मानता हूँ कि जैसे जैसे समय बीतेगा हम एक ऐसे मक़ाम पर पहुँच चुके होंगे जहाँ हम सरकार से मुक्ति पा चुके होंगे।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

स्वर्ग के सारे फरिश्ते और धरती के ताम-झाम, एक शब्द में कहूँ तो संसार के विशाल फ्रेम में रचे गए सारे अंग मन के बिना कोई पदार्थ ही नहीं है… यानी उनका होना, उन्हें अवबोध में उतरना या जानना ही है।

अनुवाद : इंदुप्रकाश कानूनगो

अकेलापन मुझे विचलित नहीं करता; जीवन पहले से संघर्षशील है, ख़ुद को समझना और ख़ुद की आदतों से जूझना।

अनुवाद : गार्गी मिश्र

दुर्भाग्य अतीत की ख़ुशी से ज़्यादा वास्तविक नहीं है।

अनुवाद : इंदुप्रकाश कानूनगो

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