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स्पर्श पर उद्धरण

त्वचा हमारी पाँच ज्ञानेंद्रियों

में से एक है, जो स्पर्श के माध्यम से हमें वस्तुओं का ज्ञान देती है। मानवीय भावनाओं के इजहार में स्पर्श की विशिष्ट भूमिका होती है। प्रस्तुत चयन में स्पर्श के भाव-प्रसंग से बुनी कविताओं को शामिल किया गया है।

मनुष्य किसी भी चीज़ से उतना नहीं डरता जितना कि अज्ञात के स्पर्श से।

एलायस कनेटी

अनासक्ति और संवेदनशून्यता में भी फ़र्क़ है।

कृष्ण बलदेव वैद

हे दुष्ट की जिह्वा रूपी झाड़ू! यद्यपि तुम निरन्तर फेंके हुए मल के द्वारा भुवनतल को निर्मल करती रहती हो, फिर भी तुम्हारे स्पर्श में भय ही होता है।

कवि कर्णपूर