रंग

सृष्टि को राग और रंगों का खेल कहा गया है। रंग हमारे आस-पास की दुनिया को मोहक और सार्थक बनाते हैं। प्रकृति रंगों से भरी है और इनका मानव जीवन पर सीधा असर पड़ता है; जबकि रंगहीनता को उदासी, मृत्यु, नश्वरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यहाँ प्रस्तुत है—रंग और रंगों को विषय बनाने वाली कविताओं के विविध रंग।

एक रंग होता है नीला और एक वह जो तेरी देह पर नीला होता है।

रघुवीर सहाय

कविता के रंग चित्रकला के प्रकृति-रंग नहीं होते।

राजकमल चौधरी

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