पराजय पर कविताएँ

जीवन-प्रसंगों में जय-पराजय

मनुष्य के प्रमुख मनोभावों में से एक है। यह किसी के हर्ष तो किसी के लिए विषाद का विषय है। यहाँ प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें ‘हार की जीत’ और ‘जीत की हार’ रेखांकित है।

अठारह दिन

बद्री नारायण

पराजित

मणि मोहन

संघर्ष

अरुण देव

पराजित मन

शंकरानंद

हम हारे हुए लोग हैं

कुशाग्र अद्वैत

गुम हुए लोग

रंजना मिश्र

पराजय-गीत

बालकृष्ण शर्मा नवीन

यूँ तो

कुमार मुकुल

हमारे गीत में

संजय कुंदन

युग और मैं

दूधनाथ सिंह

हारना

यतींद्र मिश्र

पराजय

महेश आलोक

खोटे सिक्के

नीलेश रघुवंशी

परीक्षा

अजित कुमार

मेरी हार

सोनी पांडे