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मैथिली पर ग़ज़लें

हृदयकेर तार छिनायल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

अवधारि बेसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

जानि अहाँ करबे की?

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

चुप्पी मारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

उपहास बनल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

हृदयक सिनेह

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

पूरल ने एको आस हिया

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

अथाह ई सागर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

जिनगी पहाड़ भेल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

धन्य अहाँ, धन्य अहाँ अपने ढ़कैत

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

विश्राम टा चाही

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

खोलि हृदयक द्वार बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

मुस्की भरल स्नेह दियऽ

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

खाली चिनमार हमर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सहबाक जे सन्ताप अछि

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी