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मैथिली पर गीत

मैथिली काव्य-परम्पराक

विभिन्न विधाक रचना सभक संग्रह

स्वागत गान

कालीकान्त झा ‘बूच’

विरक्ति

कालीकान्त झा ‘बूच’

अकाल

कालीकान्त झा ‘बूच’

पहाड़ हमर बाटपर

मार्कण्डेय प्रवासी

फाग कतय गेल

दीपिका चन्द्रा

सभ ठाँ छै काँट

मार्कण्डेय प्रवासी

सुविधा लेलक समाधि

मार्कण्डेय प्रवासी

हरबा लय मनक व्यथा ई

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

भगवती वंदना

कालीकान्त झा ‘बूच’

दुपहरियाक रौदमे

गंगेश गुंजन

त्रिपथगे

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

भीजै तोरे आँचर केर कोर

राम चैतन्य धीरज

ई हमरा उपहार लगैए

विभूति आनंद

छुच्छे मेघक अबरजात

अशोक कुमार मेहता

कानि रहल-ए कंगना

राम चैतन्य धीरज

नङटे नाचत देश

मार्कण्डेय प्रवासी

भरल आँखि सपना

विभूति आनंद

सुधार नइखे

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

मैथिल-मनसँ पढ़िअउ!

मार्कण्डेय प्रवासी

मातृवंदना

कालीकान्त झा ‘बूच’

चमकैए पुतरी

अशोक कुमार मेहता

आउ हमर हे राम प्रवासी

कालीकान्त झा ‘बूच’

समय कहैए, समय सुनैए

मार्कण्डेय प्रवासी

बसाबह गाम अप्पन

मार्कण्डेय प्रवासी

कहबामे असुविधा अछि

मार्कण्डेय प्रवासी

ग्लोबल मिथिला

विभूति आनंद

हमरा गाममे

मार्कण्डेय प्रवासी

देखहक हौ गान्धी बाबा!

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

तीन पत्र

राम चैतन्य धीरज

चानोसँ पूछब, सुरुजोसँ पूछब

मार्कण्डेय प्रवासी

अँगनामे

राम चैतन्य धीरज

इजोतक खातिर

दीपिका चन्द्रा

आउ, हम वसन्तकेँ बजाबी

मार्कण्डेय प्रवासी

घाटी बना रहल छी

मार्कण्डेय प्रवासी

किए देखब

अशोक कुमार मेहता

की बाजू?

मार्कण्डेय प्रवासी

दू-चारि दिनक ई यात्रा अछि

मार्कण्डेय प्रवासी

आँजुर भरि कचनारक फूल

मार्कण्डेय प्रवासी

सपनाक अनुबंध

मार्कण्डेय प्रवासी

जयजयकार करैए लोक

मार्कण्डेय प्रवासी

अहाँ छी हमर महाजन

मायानंद मिश्र

जाहि ठाढ़िपर ठाढ़ भेल छह

मार्कण्डेय प्रवासी