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मौन पर उद्धरण

एकांत : रूप की प्यारी-सी अनुपस्थिति।

मिलान कुंदेरा

अगर तुम्हारे भीतर से एक आवाज़ आती है कि तुम चित्र नहीं बना सकते, तब किसी भी तरह से तुम्हें चित्र बनाने चाहिए; और फिर वह आवाज़ शांत हो जाएगी।

विन्सेंट वॉन गॉग

मन के संयम का पहला सोपान यह है कि कुछ समय के लिए चुप्पी साधकर बैठे रहो, और मन को अपने अनुसार चलने दो।

स्वामी विवेकानन्द

स्त्रियों का मौन पुरुषों की बातचीत के सदृश होता है।

बेन जॉनसन

मौन भी बोलने का एक तरीक़ा है।

हेर्टा म्युलर

चुप रहो या शब्दों को मौन से ज़्यादा बेहतर होने दो।

पाइथागोरस

मैंने अपना मुँह बंद कर दिया और तुमसे सौ मौन तरीकों से बात की।

रूमी

प्रतिक्षण अनुभव लेता हूँ कि मौन सर्वोत्तम भाषण है। अगर बोलना ही चाहिए तो कम से कम बोलो। एक शब्द से चले तो दो नहीं।

महात्मा गांधी

मौन अर्थात् चुप रहना, यह तो अपने आधीन है तथा और भी इसमें अनेक गुण हैं। विधाता ने इसे अज्ञानता को ढ़कने का उपाय बनाया है, और विशेषकर सर्वज्ञों की सभा में यह मूर्खों का भूषण है।

भर्तृहरि

मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्म-निग्रह और भावशुद्धि को मानसिक तप कहा जाता है।

वेदव्यास
  • संबंधित विषय : तप

आपसी व्यवहार में जैसे मौन भी बोलता है, वैसे ही भाषा में शब्द का अभाव भी बोलता है। दो या तीन नुक़्ते डालकर जाने हम कितना नहीं कह जाते।

जैनेंद्र कुमार

युद्ध-काल में क़ानून मौन रहते हैं।

सिसेरो

ऐसी घटना घटित हुई है जिस पर बोलना कठिन है और चुप रहना असंभव है।

एडमंड बर्क

मौन, बौद्धिक बकवास से बेहतर है।

पाइथागोरस

मौन उसकी मातृ-भाषा हो गया है।

ओलिवर गोल्डस्मिथ

मौन आनंद का पूर्ण अग्रदूत है। आनंदमय नहीं हूँ यदि मैं बता सकूँ कि कितना आनंदित हूँ।

विलियम शेक्सपियर

मौन ईश्वर की भाषा है, बाकी सब ख़राब अनुवाद है।

रूमी

पढ़ना, मौन वार्तालाप के अतिरिक्त क्या है ?

वाल्टर सैवेज लैंडर

जब कोई व्यक्ति प्यार में कदम रखता है, तो शब्द कम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। क्योंकि जो बात ख़ामोशी से कही जा सकती है, वह शब्दों से नहीं की जा सकती।

शम्स तबरेज़ी

झूठे आरोपों का सर्वोत्तम उत्तर मौन है।

बेन जॉनसन

आवाज़ करने से आवाज़ नहीं मिटती है, चुप्पी से मिटती है।

महात्मा गांधी
  • संबंधित विषय : शोर

मौन में ही जिसका ध्यान लग जाता है, उसे आसपास की गपशप नहीं सुनाई देती।

महात्मा गांधी

अपनी बात साबित करने के चक्कर में मत पड़िए। कई बार चुप रह जाना इससे कहीं ज़्यादा कारगार साबित हो जाता है।

साइमन गिलहम

दुष्ट लोग अपने दोष के संबंध में जन्मांध से होते हैं और दूसरे का दोष देखने में दिव्य नेत्र वाले होते हैं। वे अपने गुण का वर्णन करने में गला फाड़-फाड़कर बोलते हैं और दूसरे की स्तुति के समय मौन व्रत धारण कर लेते हैं।

माघ