मोक्ष पर कविताएँ

भारतीय दर्शन में दुखों

की आत्यंतिक निवृत्ति को मोक्ष कहा गया है। मोक्ष प्राप्ति को जीवन का अंतिम ध्येय माना गया है ,जहाँ जीव जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पा लेता है। अद्वैत दर्शन में ‘अविद्या: निवृत्ति: एव मोक्ष:’ की बात कही गई है। ज्ञान और भक्ति दोनों को ही मोक्ष का उपाय माना गया है। बौद्ध और जैन जैसी अवैदिक परंपराओं में भी मोक्ष की अवधारणा पाई जाती है। बुद्ध ने इसे ‘निर्वाण’ कहा है।

नमक

सारुल बागला

इसी काया में मोक्ष

दिनेश कुशवाह

महाकुंभ

निधीश त्यागी

एक और ‘छोड़ना’

प्रियंका दुबे

आश्वस्त

मोना गुलाटी

क्रमागत-4

रमेशचंद्र शाह

सारतत्त्व

वाज़दा ख़ान
बोलिए