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व्यावहारिक पर उद्धरण

पुरुष और स्त्री का संबंध केवल आध्यात्मिक होकर व्यावहारिक भी है, इस प्रत्यक्ष सत्य को समाज जाने कैसे अनदेखा करता रहा है।

महादेवी वर्मा

शास्त्र में प्रतिपादित सभी बातें प्रयोग के लिए नहीं हैं, क्योंकि शास्त्र के विषय व्यापक होते हैं और प्रयोग एकदेशी होते हैं।

वात्स्यायन

आज के समाज में प्रतिभा तो बहुत है, परंतु श्रद्धा नहीं है। ज्ञान तो है परंतु व्यावहारिक बुद्धि नहीं है। आडंबरपूर्ण सभ्यता तो है, परंतु प्रेम सहानुभूति नहीं है।

सैमुअल स्माइल्स

काम पर विजय प्राप्त करने का प्रमुख उपाय है सब स्त्रियों को मातृरूप में देखना और स्त्रियों जैसे दुर्गा, काली, भवानी का चिंतन करना। स्त्री-मूर्ति में भगवान या गुरु का चिंतन करने से मनुष्य शनैः शनैः सब स्त्रियों में भगवान के दर्शन करना सीखता है। उस अवस्था में पहुँचने पर मनुष्य निष्काम हो जाता है। इसीलिए महाशक्ति को रूप देते समय हमारे पूर्वजों ने स्त्री मूर्ति की कल्पना की है। व्यावहारिक जीवन में सब स्त्रियों को माँ के रूप में सोचते-सोचते मन शनैः शनैः पवित्र हो जाता है।

सुभाष चंद्र बोस