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भोजपुरी पर ग़ज़लें

कुछ कहल ना

अशोक द्विवेदी

तोहार देह के छूके हवा गुजर जाई

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’

बहुत घिना के ना, तनिको दुलार के देखीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

जाने कइसन जादू

मिथिलेश ‘गहमरी’

नइखे जानत के आवत बा

तैयब हुसैन पीड़ित

हमरा हालात से

तैयब हुसैन पीड़ित

ना सुने के

गहबर गोवर्द्धन

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

बालू के देवार बा, बाबा

तैयब हुसैन पीड़ित

मकान बा सटल-सटल

कृष्णानन्द कृष्ण

लोर हर बात के गवाही बा

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

रोज भिहिलत देवाल

मिथिलेश ‘गहमरी’

तबहूँ प्यासल गगरी बा

रमाकान्त मुकुल

अतना गुमान काहे

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

सौतेलापन सगा दे गइल

तैयब हुसैन पीड़ित

करेजा बा कठोर जब ले ना नरम होई

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

चढ़ल बसन्त में

अशोक द्विवेदी

संकोच, डर, दया

गहबर गोवर्द्धन

आज अदिमी बिखर

ए. कुमार ‘आँसू’

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

मीत, जब मीत

मिथिलेश ‘गहमरी’

कही का, करी का

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

का रखल बा अब

कृष्णानन्द कृष्ण

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

हर जगह बिसवास

कृष्णानन्द कृष्ण

एकहू बून पानी घटा

गहबर गोवर्द्धन

उमिर के सँवारत

कृष्णानन्द कृष्ण

बेवफा एह जिन्दगी

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी जानवर बन

ए. कुमार ‘आँसू’

सब समय के धार

कृष्णानन्द कृष्ण

कतहीं चइता कतहीं

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

काहे उनका अभी

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

सादा कागज पर चिचरी पराइल करी

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

राजा के रंक

अशोक द्विवेदी

तीत बस तीत ना मिठास बा

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

तहरा सुधियन के

अशोक द्विवेदी