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मनुष्य पर ग़ज़लें

आदमी अब हो गइल

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी जानवर बन

ए. कुमार ‘आँसू’

जिन्दगी के सुख

ए. कुमार ‘आँसू’

चढ़ल बसन्त में

अशोक द्विवेदी

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

गढ़ाइल जे रहे मुरत

कृष्णानन्द कृष्ण

पाँव कतनो जरी

गहबर गोवर्द्धन

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

पास आके समय

अशोक द्विवेदी

आफत प बाटे आफत

गहबर गोवर्द्धन

काम सब जहुआ

ए. कुमार ‘आँसू’

तनी देख लीं ना

मिथिलेश ‘गहमरी’

का कहीं रउरा

अशोक द्विवेदी

जिनगी के डेग

मिथिलेश ‘गहमरी’

आदमी आदमी में होखेला

जौहर शफियाबादी

संकोच, डर, दया

गहबर गोवर्द्धन

आज अदिमी बिखर

ए. कुमार ‘आँसू’

कही का, करी का

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

कहाँ अन्हरिया के

मिथिलेश ‘गहमरी’

बेवफा एह जिन्दगी

कृष्णानन्द कृष्ण

राजा के रंक

अशोक द्विवेदी

बढ़त चान पर तक

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

आदमी से अब भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

भेद जे भेदिया

अशोक द्विवेदी

घुट-घुट मरत बा

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

लोग, खेलत बा

मिथिलेश ‘गहमरी’

नाव-नदी संयोग

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’