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एकता पर कविताएँ

उद्देश्य, विचार, भाव

आदि में एकमत होना एकता है। एकता में बल है। आधुनिक राज-समाज में विभिन्न आशयों में इस एकबद्धता की पुष्टि आदर्श साध्य है। इस समूहबद्धता का इतना ही महत्त्व शक्ति-समूहों के प्रतिरोध की संतुलनकारी आवश्यकता में है। कविता इन दोनों ही पक्षों से एकता की अवधारणा पर हमेशा से मुखर रही है।

हम अनेक किंतु एक

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

मातृभूमि

सोहनलाल द्विवेदी

बात बोलेगी

शमशेर बहादुर सिंह

जोखिम

अमित तिवारी

जगि रहे बापू केर सपन

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

आजादी

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

बसइ गाँवइँ मा हिन्दुस्तान

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

सहकारी खेती

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

ईस्वरु

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

मनभोली अवधी

मोहनलाल यादव

चेतउनी

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बालक

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

सायुज्य

धूमकेतु

चकमक की चिनगारियाँ

गजानन माधव मुक्तिबोध