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आवश्यकता पर उद्धरण

आवश्यकताओं की निर्विरोध और निर्बंध पूर्ति ही मनुष्य जीवन की स्वतंत्रता है।

विजयदान देथा

जो कला जीवन की आवश्यकताओं से उत्प्रेरित नहीं होती, उसमें विषयगत वैविध्य का अभाव रहता है और उसके रूप-तत्व का कौशल ही अधिक बढ़ जाता है।

विजयदान देथा

किसी मक़सद के लिए मरने के लिए साहस की आवश्यकता होती है, लेकिन किसी उद्देश्य के लिए जीने के लिए भी साहस की आवश्यकता होती है।

अज़र नफ़ीसी
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मेरे इतने लोकप्रिय होने का कारण यह है कि मैं दूसरों को वह लौटाती हूँ जो उन्हें स्वयं में खोजने की आवश्यकता होती है।

अज़र नफ़ीसी

आप सिर्फ़ किसी चीज़ के ख़िलाफ़ ज़िद्दी नहीं हो सकते, आपको किसी चीज़ के पक्ष में भी ज़िद्दी होने की ज़रूरत है।

अज़र नफ़ीसी

मैं जितना बूढ़ा होता जा रहा हूँ, उतना ही आश्वस्त होता जा रहा हूँ कि मैं परम आवश्यक नहीं हूँ।

लियोनार्ड कोहेन

उन चीज़ों को भूलना आसान है, जिनकी आपको अब आवश्यकता नहीं है।

हारुकी मुराकामी

हमें चार चीज़ों की ज़रूरत है। हवा, पानी, रोटी और कपड़ा। दो चीज़ें भगवान ने मुफ़्त दी हैं। और जैसे रोटी घर में तैयार होती है, वैसे ही कपड़ा भी हमारे घर में बनना चाहिए।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

अन्य बहुत से शास्त्रों का संग्रह करने की क्या आवश्यकता है? गीता का ही अच्छी तरह से गान करना चाहिए, क्योंकि वह स्वयं पद्मनाभ भगवान् के मुख कमल से निकली हुई है।

वेदव्यास

इस पृथ्वी पर एक ख़ास तरह के आदमी हैं जो मानों फूस की आग हैं। वे झट से जल भी उठते हैं और फिर चटपट बुझ भी जाते हैं। उन लोगों के पीछे सदा-सर्वदा एक आदमी रहना चाहिए जो आवश्यकता के अनुसार उनके लिए फूस जुटा सके।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

काम पड़ने पर ही सबके वास्तविक स्वरूप का पता चलता है। बातचीत और कृति से ही रंक, क्षुद्र और राजा का पता चलता है।

दयाराम

वैदिक जीवन का जिस किसी भी बाह्य-पदार्थ से सम्बन्ध था, उसे वैदिक ऋचाओं में जीवन-आवश्यकता के अनुरूप सहज अभिव्यक्ति मिली है।

विजयदान देथा

आवश्यकता कोई क़ानून नहीं जानती।

पब्लिलियस साइरस

जब हम कुछ भी लेते हैं, तब दूसरों के मुँह से निकालते हैं। इसलिए हरेक चीज़ लेने के समय हम देखें कि आवश्यक चीज़ ही लें और आवश्यकता कम-से-कम रखें।

महात्मा गांधी

तुम्हारा मित्र तुम्हारे अभावों की पूर्ति है।

खलील जिब्रान

असीम आवश्यकता नहीं, तृष्णा होती है।

जैनेंद्र कुमार

पशु का स्वभाव है कि वह ऐसा कोई काम नहीं करता, जिसका उसकी जैव आवश्यकता के लिए महत्त्व नहीं हो।

रामधारी सिंह दिनकर

आश्रय की ज़रूरत जब सबसे ज़्यादा होती है, तब आश्रय कितना दुर्लभ होता है।

बिमल मित्र
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आवश्यकता के समान कोई गुण नहीं है।

विलियम शेक्सपियर

मनुष्य का मानवीय व्यक्तित्व तब आरम्भ होता है, जब वह ऐसे कार्य करने लगता है, जिनका जैव आवश्यकता की दृष्टि से कोई ख़ास उपयोग नहीं है

रामधारी सिंह दिनकर