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लोक पर लोककथाएँ

लोक का कोशगत अर्थ—जगत

या संसार है और इसी अभिप्राय में लोक-परलोक की अवधारणाएँ विकसित हुई हैं। समाज और साहित्य के प्रसंग में सामान्यतः लोक और लोक-जीवन का प्रयोग साधारण लोगों और उनके आचार-विचार, रहन-सहन, मत और आस्था आदि के निरूपण के लिए किया जाता है। प्रस्तुत चयन में लोक विषयक कविताओं का एक विशेष और व्यापक संकलन किया गया है।

नागकुमार

अज्ञात

अंबुजमणि

अज्ञात

चार उपदेश

अज्ञात

तअपोइ

अज्ञात

वनकन्या

अज्ञात

सात बहनें

अज्ञात

भालू बहू

अज्ञात