ईश्वर अपना रूप पल-पल बदलता रहता है। ख़ुशक़िस्मत हैं वे जो उसे उसके तमाम रूपों में भी चीन्ह सकते हैं।
भाग्य से बढ़कर शक्ति और कौन-सी है?
उद्यम न करने पर भी भाग्य द्वारा नियोजित पूर्व जन्मों में किया हुआ कर्म शुभाशुभ फल प्रदान करता है।