लोक पर गीत

लोक का कोशगत अर्थ—जगत

या संसार है और इसी अभिप्राय में लोक-परलोक की अवधारणाएँ विकसित हुई हैं। समाज और साहित्य के प्रसंग में सामान्यतः लोक और लोक-जीवन का प्रयोग साधारण लोगों और उनके आचार-विचार, रहन-सहन, मत और आस्था आदि के निरूपण के लिए किया जाता है। प्रस्तुत चयन में लोक विषयक कविताओं का एक विशेष और व्यापक संकलन किया गया है।

बहुत देर से सोकर जागी

कुमार विश्वास

फागुन का रथ

देवेंद्र कुमार बंगाली

आमों में बौर आ गए

देवेंद्र कुमार बंगाली

अगहन

देवेंद्र कुमार बंगाली

तुम्हारे नाम

देवेंद्र कुमार बंगाली

सूरज ओ!

देवेंद्र कुमार बंगाली

गाँव की पहाड़ी

देवेंद्र कुमार बंगाली

दिन का सेहरा

देवेंद्र कुमार बंगाली

बौरों के दिन

देवेंद्र कुमार बंगाली

ईमा

देवेंद्र कुमार बंगाली

बाग़ों में टहलता अँधेरा

देवेंद्र कुमार बंगाली

ऐसे वैसे, कैसे-कैसे

देवेंद्र कुमार बंगाली

फूली है मटर

देवेंद्र कुमार बंगाली

कुछ कहे तो कहे क्या

देवेंद्र कुमार बंगाली

यह अकाल इंद्र-धनुष

देवेंद्र कुमार बंगाली

लो आए मक्का में दाने

देवेंद्र कुमार बंगाली
बोलिए