चीज़ें पर कहानियाँ
कविता के भाव में कहें
तो चीज़ें वे हैं जिनसे हमारी दुनिया बनती है और बर्बाद भी होती है। यहाँ प्रस्तुत है चीज़ों की उपस्थिति-अनुपस्थिति को दर्ज करती कविताओं का यह व्यापक चयन।
पत्रकार बुद्धिराम @ पत्रकारिता डॉट कॉम
बुद्धिराम की निगाहें कंप्यूटर पर और ऊंगलियाँ की बोर्ड पर थीं मगर ख़बर थी कि बन ही न रही थी... वह कहीं और ख़यालों में विचर रहा था। सीट पर सिर्फ़ उसका तन था जबकि मन कहीं और। सोच रहा था कि जिनकी वह दिल से इज़्ज़त करता है, जिनके एक आदेश पर टाइलेट तक रोककर
अशोक मिश्र
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