Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

19 अगस्त 2024

‘जो रेखाएँ न कह सकेंगी’

‘जो रेखाएँ न कह सकेंगी’

एक युग बीत जाने पर भी मेरी स्मृति से एक घटा भरी अश्रुमुखी सावनी पूर्णिमा की रेखाएँ नहीं मिट सकी हैं। उन रेखाओं के उजले रंग न जाने किस व्यथा से गीले हैं कि अब तक सूख भी नहीं पाए—उड़ना तो दूर की बात है।

15 अगस्त 2024

आज के दिन भूलकर भी न देखें ये फ़िल्में

आज के दिन भूलकर भी न देखें ये फ़िल्में

इन पंक्तियों के लेखक के एक प्राचीन आलेख (कभी-कभी लगता है कि गोविंदा भी कवि है) के शीर्षक की तरह ही यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक भी बहुत बड़ा हो रहा था, इसलिए इसे किंचित संपादित करना पड़ा। दरअस्ल, पूरा

04 अगस्त 2024

मुग़लसराय से दिल्ली : मित्रता के तीस साल

मुग़लसराय से दिल्ली : मित्रता के तीस साल

मेरे एक मित्र हैं सुखलाल जी। उनसे मेरी मित्रता के लगभग तीस साल होने को हैं। वैसे तो वह मेरे साथ दिल्ली महानगर में एक प्रकाशन में काम कर चुके हैं, लेकिन उनसे और नज़दीकियाँ इसलिए हैं कि वह मेरे गाँव क्

16 जून 2024

क्या विरासत में मिलती है लेखनी?

क्या विरासत में मिलती है लेखनी?

ज़्यादा न लिखो। अपने पात्रों को अपनी कहानी बताने दो और इस पूरे काम में दख़ल मत दो। अपने पाठक को पहले ही पृष्ठ से यूँ बाँध लो कि वे कथा से ख़ुद को दूर न रख पाएँ। अगर लिखने की ज़रूरत समझ आए तो इसे फिर से

26 मई 2024

ख़ुशियों का एरोडायनामिक्स : काग़ज़ के हवाई जहाज़

ख़ुशियों का एरोडायनामिक्स : काग़ज़ के हवाई जहाज़

हर साल 26 मई को पार्कों, खेत-खलिहानों और कक्षाओं में एक अजीब-ओ-ग़रीब लेकिन बेहद रोमांचक दृश्य देखने को मिलता है : आसमान रंग-बिरंगे और सफ़ेद रंग के काग़ज़ के हवाई जहाज़ों से भर जाता है। नेशनल पेपर एयरप्लेन

08 मई 2024

रवींद्रनाथ ने कहा है कि...

रवींद्रनाथ ने कहा है कि...

हमारे गाँव में और कुछ हो या न हो, कुछ मिले न मिले... पर रवींद्रनाथ थे। वह थे और वह पूरी तरह से घर के आदमी थे। घरवाले वही होते हैं जिन्हें देखकर भी हम अनदेखा करते हैं, जिन्हें सोचकर भी हम नहीं सोचते य

07 मई 2024

जब रवींद्रनाथ मिले...

जब रवींद्रनाथ मिले...

एक भारतीय मानुष को पहले-पहल रवींद्रनाथ ठाकुर कब मिलते हैं? इस सवाल पर सोचते हुए मुझे राष्ट्रगान ध्यान-याद आता है। अधिकांश भारतीय मनुष्यों का रवींद्रनाथ से प्रथम परिचय राष्ट्रगान के ज़रिए ही होता है, ह

14 अप्रैल 2024

बंगाली, बैशाख और रवींद्रनाथ

बंगाली, बैशाख और रवींद्रनाथ

बांग्ला नव वर्ष का पहला वैशाख वास्तव में बंगालियों के प्राणों का उत्सव है। इस उत्सव में कोई विदेशीपन नहीं है; बल्कि इसमें बंगाली परंपरा, आत्म-परिचय और संस्कृति है। इस दिन नए परिधान में, नए साज में, र

11 अप्रैल 2024

'जैसी हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी'

'जैसी हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी'

छतों पर ठट का ठट जमा है, शाम हल्की शफ़क़ में डूबी आसमान पर लहरों के साथ किसी बच्चे की तरह अटखेलियाँ करती मुस्कुरा रही है। अभी सूरज डूबने में वक़्त है, मगर टोपियाँ, दुपट्टे नुमूदार हो रहे हैं। आख़िरी इफ़्