देशभक्ति पर बेला
देश के प्रति आस्था,
अनुराग और कर्तव्यपरायणता ही नहीं, देश से अपेक्षाओं और समकालीन मोहभंग के इर्द-गिर्द देशभक्ति के विस्तृत अर्थों की पड़ताल करती कविताओं से एक चयन।
‘धुरंधर द रिवेंज’ से बचकर लौटे धुरंधर का बयान
मैंने भी अंतत ‘Dhurandhar The Revenge’ देख ली। वैसे आजकल के ‘मल्टीप्लेक्स कल्चर’ वाले दौर में पीवीआर [PVR] जैसे सिनेमाई मंदिरों में माथा टेकना सीधे अपनी जेब पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने जैसा है, जहाँ ए
इक्कीस : नफ़रत के दौर में मोहब्बत का पैग़ाम
ख़ून अपना हो या पराया हो नस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर जंग मशरिक़ में हो कि मग़रिब में अम्न-ए-आलम का ख़ून है आख़िर —साहिर लुधियानवी की नज़्म ‘ऐ शरीफ़ इंसानों’ से बीते साल (2025) दिसंबर में हिंदी
आज के दिन भूलकर भी न देखें ये फ़िल्में
इन पंक्तियों के लेखक के एक प्राचीन आलेख (कभी-कभी लगता है कि गोविंदा भी कवि है) के शीर्षक की तरह ही यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक भी बहुत बड़ा हो रहा था, इसलिए इसे किंचित संपादित करना पड़ा। दरअस्ल, पूरा