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ख़बर पर उद्धरण

मीडिया का आधुनिक उन्माद नीरसता पर भीषण हमला है, क्योंकि हमें ईमानदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए कि ज़यादातार लोगों के जीवन ऐसे हैं, जिनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

मीडिया हमारे दिमाग़ में जो तस्वीर तैयार करता रहता है; वह निरंतर उन घटनाओं के विपरीत होती है, जो आपदा की घड़ियों में घटित होती है।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

हिंदी पत्रकारिता बौद्धिक लिहाज़ से तो ऊँघती ही ऊँघती है; व्यावसायिक लिहाज़ से भी पुराने क़स्बों के आलसी, गप्पी, लद्दड़, दुकानदारों की तरह है, जिन्होंने बाजार बढ़ाने में नहीं, घटाने में एक भूमिका अदा की।

ललित कार्तिकेय

जिस तरह परानुभूति विशिष्ट को केंद्र में लाकर हमें गुमराह करती है, उसी तरह समाचार असामान्य को केंद्र में लाकर हमें छलता है।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

आधुनिक हिंदी के निर्माण में पत्रकारिता का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, पर आज पत्रकारिता हिंदी को प्रतिदिन क्षत-विक्षत करने की मुहिम बन गई है।

कृष्ण कुमार

किसी किसी तरह बुरी ख़बरें, चाहे वह कोलाहल में दबी हों या गूँजों में खोई हुई—फिर भी अपना रास्ता बनाकर अंततः सुनाई दे ही जाती है।

झुम्पा लाहिड़ी

हिन्दवी उत्सव 2026

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