जिसमें आम के बौरों के केसरसमूह की सुगंध से दिशाएँ व्याप्त हो रही हैं, और मीठे-मीठे मकरंद का पान कर भ्रमर उन्मत्त हो रहे हैं—ऐसे ऋतुराज में किसे उत्कंठा नहीं होती।
राजा के लिए अर्थ को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि अर्थ संपूर्ण लोकयात्रा का मूल है और वेश्या के लिए अर्थ को अधिक उपादेय बताया है। इस प्रकार धर्म, अर्थ, काम—त्रिवर्ग की प्रतिपत्ति का प्रतिपादन है।