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नई पीढ़ी के कवि।

नई पीढ़ी के कवि।

ज़ुबैर सैफ़ी के बेला

01 मार्च 2025

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

तीन का आँकड़ा क्या है?  तीन लोग हों, तो भी अर्थी ले जाई जा सकती है, बस एक तरफ़ थोड़ा झुकाव रहेगा। लोक-विश्वास देखें, तो तीन तिगाड़ा-काम बिगाड़ा। सुखी परिवार को भाषा को बिन परखे कहा जाए तो दो मिय

01 फरवरी 2025

क़स्बाई ज़िंदगी की तिकड़मों का लुत्फ़

क़स्बाई ज़िंदगी की तिकड़मों का लुत्फ़

हिंदुस्तान क़स्बों और नगरों से भरा देश है। अगर हिंदुस्तान से क़स्बे निकाल दिए जाएँ, तो बस धूल-खाते, मिलों के शोर से भरे इलाक़े, बजबजाते हुए नाले, एक दूसरे से उलझने को तैयार गाड़ियाँ और आसमान की कोख म

22 जनवरी 2025

एक मुसलमान का ‘पाताल लोक’

एक मुसलमान का ‘पाताल लोक’

‘पाताल लोक’ का दूसरा सीज़न पूरा देखा और इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी की ‘हाथी’ जैसी अदाकारी के आगे सारे अदाकार फीके पड़ गए। मेरे जैसे दर्शक को यह देखकर ख़ुशी हुई कि चलो कम से कम किसी किरदार का नाम अंसारी

19 नवम्बर 2024

उर्फ़ी जावेद के सामने हमारी हैसियत

उर्फ़ी जावेद के सामने हमारी हैसियत

हिंदी-साहित्य-संसार में गोष्ठी-संगोष्ठी-समारोह-कार्यक्रम-आयोजन-उत्सव-मूर्खताएँ बग़ैर कोई अंतराल लिए संभव होने को बाध्य हैं। मुझे याद पड़ता है कि एक प्रोफ़ेसर-सज्जन ने अपने जन्मदिन पर अपने शोधार्थी से

19 सितम्बर 2024

हिंदी के चर्चित घड़ी-प्रसंग की घड़ी बंद होने के बाद...

हिंदी के चर्चित घड़ी-प्रसंग की घड़ी बंद होने के बाद...

घड़ी तो सब ही पहनते हैं। कई सौ सालों पहले जब पीटर हेनलेन ने पहली घड़ी ईजाद की होगी, तो उसके बाप ने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ये इतनी ज़रूरी चीज़ साबित होगी कि दुनिया हिल जाएगी। दानिशमंद लोग कहते

10 मई 2024

वालिद के नाम एक ख़त

वालिद के नाम एक ख़त

प्यारे अब्बा! मैं जानता हूँ कि मैं इस तहरीर के पहले लफ़्ज़ को आपको पुकारने के लिए इस्तेमाल करने के लायक़ नहीं हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि मैंने होश सँभालने से लेकर अब तक आपको सिर्फ़ दुख पहुँचाया ह

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