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हेर्टा म्युलर

1953

रोमानियाई-जर्मन उपन्यासकार, कवयित्री और निबंधकार। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित।

रोमानियाई-जर्मन उपन्यासकार, कवयित्री और निबंधकार। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित।

हेर्टा म्युलर के उद्धरण

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त्वचा, हड्डियों और भूरे रंग का पानी—इन तीनों के मेल में, पुरुष और स्त्री के बीच के सारे फ़र्क़ ख़त्म हो जाते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जब आप उम्मीद और डर को ख़त्म कर देते हैं, तब आप मर जाते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

बदनामी मनुष्य को गंदगी से भर देती है, उसका दम घुटता है, क्योंकि वह अपना बचाव नहीं कर सकता।

अनुवाद : सरिता शर्मा

युद्ध से पहले सेब का पेड़ चर्च के पीछे स्थित था। वह सेब का एक ऐसा पेड़ था जिसने अपने सेबों को खा लिया था।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मौत का सामना करने के लिए आपको ज़्यादा जीवन की ज़रूरत नहीं है, बस उस जीवन की ज़रूरत है जो अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

कभी-कभी चीज़ें एक कोमलता प्राप्त कर लेती हैं, ऐसी राक्षसी कोमलता जिसकी हम उनसे उम्मीद नहीं रखते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैं सोचती हूँ कि आप ईमानदारी से जो सोचते हैं, उसके अनुरूप कैसे जी सकते हैं?

अनुवाद : सरिता शर्मा

चीज़ें इस यक़ीन से आगे बढ़ती हैं कि वे बनी रहेंगी।

अनुवाद : सरिता शर्मा

कोई भी शहर तानाशाही में विकसित नहीं हो सकता, क्योंकि जब निगरानी की जाती है, तब सब कुछ बौना रह जाता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : शहर

मैंने गंदगी में और उपेक्षित होकर अकेले रहने के लिए तड़प विकसित की।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अजनबी लोगों के साथ जुड़ने से बेहतर है कि घर पर कमरे और बग़ीचे में बदसूरत लोगों के साथ रहा जाए।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैं सीढ़ियों पर परिहास की पात्र थी और मेरा कार्यालय एक रूमाल था।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अगर केवल सही व्यक्ति को देश छोड़ना होता, तब बाक़ी सभी लोग देश में रह सकते थे।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : देश

एडगर ने कहा है कि जब हम नहीं बोलते हैं, तब हम असहनीय हो जाते हैं; और जब हम बोलते हैं, तब हम ख़ुद को मूर्ख बना रहे होते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मौन भी बोलने का एक तरीक़ा है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : मौन

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