
क्या निजी भाषा के नियम, नियमों की प्रतिच्छाया हैं?—जिस तुला पर प्रतिच्छाया को तोला जाता है, वह तुला की प्रतिच्छाया नहीं होती।

तुम जो हो तुम उसे नहीं देखते, तुम उसे देखते हो जो तुम्हारी परछाईं है।

जिस चीज़ की कोई छाया नहीं होती, उसमें जीवित रहने की ताक़त भी नहीं होती।

पतन, उत्थान की; मृत्यु, जीवन की एक मात्र सखा-छाया है।