Font by Mehr Nastaliq Web

अहंकार पर कविताएँ

यहाँ प्रस्तुत चयन में

अहंकार विषयक कविताओं को संकलित किया गया है। रूढ़ अर्थ में यह स्वयं को अन्य से अधिक योग्य और समर्थ समझने का भाव है जो व्यक्ति का नकारात्मक गुण माना जाता है। वेदांत में इसे अंतःकरण की पाँच वृत्तियों में से एक माना गया है और सांख्य दर्शन में यह महत्त्व से उत्पन्न एक द्रव्य है। योगशास्त्र इसे अस्मिता के रूप में देखता है।

एक तिनका

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

अहं का उद्भव

पाब्लो अर्मांदो फर्नांदेस

अहम्मन्य

स्टीफन स्पेंडर

मेरा मैं

शशि शेखर

अपना अहंकार तुम गाते रहे रात भर

कृष्ण मुरारी पहारिया

एकपहरीक बेटी दुपहरी

विवेकानन्द ठाकुर

आन्हर छथि भगवान

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

हहरत हियरा

अनीता साह

कोणार्क

नीरजा रेणु

मानव औरु दिया

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

माटिक महादेव

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

कलिंग-विजय

नीरजा रेणु

मैं

जावेद आलम ख़ान

स्वीकृति का सवाल

पल्लवी जयराम

ज़िद

सुधांशु फ़िरदौस

?

पद्मजा शर्मा

अहम्

मदनलाल डागा

दंभ

सुनील झा