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आलोचना पर कविताएँ

ओफ्ओह

रफ़ीक़ शादानी

उल्लू हौ

रफ़ीक़ शादानी

संसद मा अँधेरु भरा

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

नीक लोकतंत्रु भा

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

उयि अउर आयिं हम अउर आन!

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

माली

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

तब तक संसद भंग भइ

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

कयिस कयिस कनवजिया हउ?

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'