Font by Mehr Nastaliq Web
Germaine Greer's Photo'

जेर्मेन ग्रीयर

1939 | मेलबोर्न

सुप्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई लेखिका, नारीवादी विचारक और सामाजिक समालोचक। 'द फीमेल यूनक' कृति के लिए उल्लेखनीय।

सुप्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई लेखिका, नारीवादी विचारक और सामाजिक समालोचक। 'द फीमेल यूनक' कृति के लिए उल्लेखनीय।

जेर्मेन ग्रीयर के उद्धरण

4
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

समाज तुम्हें जो छवि देता है उसके बजाय, अपनी ख़ुद की छवि गढ़ने का निर्णय लेने के लिए बहुत साहस और स्वतंत्रता की ज़रूरत है, लेकिन जैसे-जैसे तुम आगे बढ़ते जाते हो, यह आसान हो जाता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जो गृहिणियाँ अपने पति को अख़बार के पीछे से घूर रही होती हैं, या बिस्तर पर उनकी साँसों को सुन रही होती हैं, वे किराए के कमरे में रहने वाली अविवाहिता से भी ज़्यादा अकेली हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

झूठ घृणित है और उसका अपना स्वयं का विकराल जीवन है। वह अपने चारों ओर फैली सच्चाई को दूषित कर देता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

हर स्त्री जानती है कि उसकी अन्य सभी उपलब्धियों के बावजूद, अगर वह सुंदर नहीं है तो वह असफल है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

स्त्री के रुतबे को उसके द्वारा किसी पुरुष को आकर्षित करने और फुसलाने की क्षमता से नहीं मापा जाना चाहिए।

अनुवाद : सरिता शर्मा

पढ़ना मेरी पहली एकमात्र बुरी आदत थी और उससे अन्य सब अवगुण आए। मैंने खाते वक़्त पढ़ा, मैंने शौचालय में पढ़ा, मैंने स्नानघर में पढ़ा। जब मुझे सोना चाहिए था, मैं पढ़ रही थी।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : आदत

एक गृहिणी के काम का कोई महत्व नहीं होता है : उस काम को बस फिर से करना होता है। बच्चों को पालना कोई वास्तविक पेशा नहीं है, क्योंकि बच्चे एक ही तरीक़े से बड़े होते हैं, उनका पालन-पोषण किया जाए या नहीं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

उदासी की कोख से बोध और व्यंग्य उत्पन्न होते हैं; उदासी असहज और अप्रिय है, इसीलिए उपभोक्ता समाज इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मुझे लगता है कि वे पुरुष जो स्त्रियों के प्रति व्यक्तिगत रूप से सबसे अधिक विनम्र हैं, जो उन्हें देवदूत कहते हैं, वे गुप्त रूप से स्त्रियों का सबसे अधिक तिरस्कार करते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

सुरक्षा जीवन का नकार है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आप केवल एक बार युवा होते हैं, लेकिन हमेशा के लिए अपरिपक्व बने रह सकते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मानव के पास ख़ुद को गढ़ने का अपरिहार्य अधिकार है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आनंद का सार सहजता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

स्वतंत्रता भयानक है, लेकिन वह प्राण-पोषक भी है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अगर स्त्री कभी ख़ुद को मुक्त नहीं करती है, तब वह कैसे जान पाएगी कि उसे कितनी दूर तक जाना है? अगर वह अपने ऊँची एड़ी के जूते कभी नहीं उतारेगी, तब वह कैसे जान पाएगी कि वह कितनी दूर चल सकती है या कितनी तेज़ी से दौड़ सकती है?

अनुवाद : सरिता शर्मा

Recitation