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व्यंग्य पर ग़ज़लें

व्यंग्य अभिव्यक्ति की

एक प्रमुख शैली है, जो अपने महीन आघात के साथ विषय के व्यापक विस्तार की क्षमता रखती है। काव्य ने भी इस शैली का बेहद सफल इस्तेमाल करते हुए समकालीन संवादों में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। इस चयन में व्यंग्य में व्यक्त कविताओं को शामिल किया गया है।

नोर चुअएला स' की

विभूति आनंद

धन्य अहाँ, धन्य अहाँ अपने ढ़कैत

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

नाक हुवै ऊँची

अशोक अज्ञानी

ई हवा जे बहि रहल छै

आनन्द मोहन झा

कतय छै आँच बूझल छै

आनन्द मोहन झा