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व्यंग्य पर गीत

व्यंग्य अभिव्यक्ति की

एक प्रमुख शैली है, जो अपने महीन आघात के साथ विषय के व्यापक विस्तार की क्षमता रखती है। काव्य ने भी इस शैली का बेहद सफल इस्तेमाल करते हुए समकालीन संवादों में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। इस चयन में व्यंग्य में व्यक्त कविताओं को शामिल किया गया है।

मदवा पीले पागल जोबन बीत्यो जात

भारतेंदु हरिश्चंद्र

आजादी पउलस के?

रामजियावान दास ‘बावला’

अबकी जिताइ के देखा हो पंचो

रामजियावान दास ‘बावला’

नमन बाटै

रामजियावान दास ‘बावला’

आइल फिर 26 जनउरी

रामजियावान दास ‘बावला’

वाह रे हिन्दुस्तान!

रामजियावान दास ‘बावला’

कइसे कहीं की भारत हौ

रामजियावान दास ‘बावला’

अगर महराज न बदलवा

रामजियावान दास ‘बावला’

चूरन अमल बेद का भारी

भारतेंदु हरिश्चंद्र

बतावा कहाँ रचइबा रास

रामजियावान दास ‘बावला’

शुभे हो शुभे!

मार्कण्डेय प्रवासी

बाजल डंका

मार्कण्डेय प्रवासी

चने जोर गरम

भारतेंदु हरिश्चंद्र