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अवधी पर ग़ज़लें

आपन बूते राह

अशोक अज्ञानी

अइस बनै माहौल

अशोक अज्ञानी

जयिसे हवा के साथ

अशोक अज्ञानी

कब छाँही कब

अशोक अज्ञानी

खल्लर मल्लर करै

अशोक अज्ञानी

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

अस पुरिखन कै नाक

अशोक अज्ञानी

नाक हुवै ऊँची

अशोक अज्ञानी

छुट्टा हरहा खेतु

अशोक अज्ञानी

गीली केहिकै कोर

अशोक अज्ञानी

नाव डूबत है

अशोक अज्ञानी