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राजेंद्र देथा

1999 | बीकानेर, राजस्थान

नई पीढ़ी के कवि।

नई पीढ़ी के कवि।

राजेंद्र देथा के बेला

11 जनवरी 2025

अरुणाचल के न्यीशी जीवन का स्मृति-राग

अरुणाचल के न्यीशी जीवन का स्मृति-राग

‘गाय-गेका की औरतें’ जोराम यालाम नबाम के अब तक के जीवन में संभव में हुए प्रसंगों के संस्मरण हैं। जिस जगह के ये संस्मरण हैं; उसकी अवस्थिति अरुणाचल प्रदेश के ठेठ ग्रामीण ज़िले लोअर सुबानसिरी में है। पुस्

06 अक्तूबर 2024

'बाद मरने के मेरे घर से यह सामाँ निकला...'

'बाद मरने के मेरे घर से यह सामाँ निकला...'

यह दो अक्टूबर की एक ठीक-ठाक गर्मी वाली दोपहर है। दफ़्तर का अवकाश है। नायकों का होना अभी इतना बचा हुआ है कि पूँजी के चंगुल में फँसा यह महादेश छुट्टी घोषित करता रहता है, इसलिए आज मेरी भी छुट्टी है। मेर

04 जुलाई 2024

सरकारी नौकर, टीका और अन्य कहानियाँ

सरकारी नौकर, टीका और अन्य कहानियाँ

दोस्तो! हम पाक-विस्थापितों में टीके के रिवाज का तारीख़ी सिलसिला कब शुरू हुआ, मेरे पास इसकी कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है। मेरे परिवार में एक ताऊ ज़रूर हैं, जो बात-बात पर पारिवारिक मौक़ों में यह कहते हु

18 मई 2024

मोटरसाइकिलों का लोक वाया इन्फ़्लुएंसर

मोटरसाइकिलों का लोक वाया इन्फ़्लुएंसर

सोशल मीडिया के आला कर्मचारियों ने जब जनता के लिए रील्स फ़ॉर्मेट संभव किया, तब उन्हें मालूम न होगा कि लोक के गणराज में रील्स का क्या हाल होगा! उन्हें क़तई पता नहीं था कि इसी रील्स से सुदूर बाड़मेर के पत

10 अप्रैल 2024

‘बिना शिकायत के सहना, एकमात्र सबक़ है जो हमें इस जीवन में सीखना है।’

‘बिना शिकायत के सहना, एकमात्र सबक़ है जो हमें इस जीवन में सीखना है।’

जैसलमेर 10 मई 2023  आज जैसलमेर आया हूँ। अपनी भुआ के यहाँ। बचपन में यहाँ कुछ अधिक आना होता था। अब उतना नहीं रहा। दुपहर में साथी के साथ हमीरा जाना हुआ। दिवंगत साकर ख़ान के घर। जीवन में लय का बहुत मह

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