सुमिरन पर सबद

इष्ट और गुरु का सुमिरन

भक्ति-काव्य का प्रमुख ध्येय रहा है। प्रस्तुत चयन में सुमिरन के महत्त्व पर बल देती कविताओं को शामिल किया गया है।

बारहमासा

तुलसी साहब

राम-राम सभु को कहै

गुरु अमरदास

आदि अनादि मेरा साँई

संत दरिया (मारवाड़ वाले)