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चाँद पर गीत

चाँद मनुष्य का आदिम

सहयात्री है जो रात्रि-स्याह के सुख-दुःख में उसका संगी-साथी हो जाता है। प्रेमिल बिंबों-प्रतीकों के साथ ही किसी कवि की ही कल्पना ने उसे देवत्व तक सौंप दिया है।

चंदा आधी रात का

हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’

सभ ठाँ छै काँट

मार्कण्डेय प्रवासी

रतिया चान बिना अन्हरिया लगे

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

नुका रहल अछि चान

मार्कण्डेय प्रवासी

मेंहदी के हरियर पतिया

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

चाँद-किरन

देवेंद्र कुमार बंगाली

क्या हुआ जो

अंकित काव्यांश

एहि खन चान क्षितिज पर आयल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

चंद्रमा

हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’

सागर की पूर्णिमा

शंभुनाथ सिंह

बाँह फैलाए

किशन सरोज