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चाँद पर ग़ज़लें

चाँद मनुष्य का आदिम

सहयात्री है जो रात्रि-स्याह के सुख-दुःख में उसका संगी-साथी हो जाता है। प्रेमिल बिंबों-प्रतीकों के साथ ही किसी कवि की ही कल्पना ने उसे देवत्व तक सौंप दिया है।

रुबाइयाँ (एन.सी. ई.आर.टी)

फ़िराक़ गोरखपुरी

देंह के रंग

मिथिलेश ‘गहमरी’

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

तमाशा

डी. एम. मिश्र