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मुमताज़ इक़बाल

2001 | शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश

नई पीढ़ी के कवि-गद्यकार और अनुवादक।

नई पीढ़ी के कवि-गद्यकार और अनुवादक।

मुमताज़ इक़बाल के बेला

24 जनवरी 2025

जावेद आलम ख़ान की ‘स्याह वक़्त की इबारतें’ और अन्य कविताएँ पढ़ते हुए…

जावेद आलम ख़ान की ‘स्याह वक़्त की इबारतें’ और अन्य कविताएँ पढ़ते हुए…

कविता की एक किताब में—एक ज़ख़्मी देश, एक आहत मन! एक कवि—जिसका नाम विमर्श में खो गया, जिसके चेहरे की ओर भी सबने नहीं देखा, लेकिन उसकी आवाज़ कुछ दिलों में, कुछ कविता की बातों के रास्ते पर, साहित्य के क

20 मई 2024

संगीत, प्यार और दर्द से बुना गया एक उपन्यास

संगीत, प्यार और दर्द से बुना गया एक उपन्यास

“इतने साल पहले मेरे साथ क्या हुआ था? मुझे प्यार मिले या न मिले, मैं उस शहर में बना नहीं रह सकता था। मैंने ठोकर खाई, मेरा दिमाग़ ठस हो गया, मुझे अपनी हर साँस बोझ लगने लगी। मैंने उससे कह दिया कि मैं जा

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