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गाँव पर गीत

महात्मा गांधी ने कहा

था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। आधुनिक जीवन की आपाधापी में कविता के लिए गाँव एक नॉस्टेल्जिया की तरह उभरता है जिसने अब भी हमारे सुकून की उन चीज़ों को सहेज रखा है जिन्हें हम खोते जा रहे हैं।

वही मोरा गाँव

अन्नू रिज़वी

अबूझ पहेली

विनम्र सेन सिंह

गामकेँ प्रणाम

गंगेश गुंजन

बारूद पर गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

बसाबह गाम अप्पन

मार्कण्डेय प्रवासी

हमरा गाममे

मार्कण्डेय प्रवासी

की बाजू?

मार्कण्डेय प्रवासी

जागौ धरती मइया

अशोक अज्ञानी

अड़हूल फूलक गीत

गंगेश गुंजन

झलकेले मोतिया

भोलानाथ गहमरी

के देई गुड़ रोटी

भोलानाथ गहमरी

गामे मोन पड़ैए

कालीकान्त झा ‘बूच’

धधक रहल गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

काल बड़ा विकराल खड़ा

रामजियावान दास ‘बावला’

हमरो गाँव रे

भोलानाथ गहमरी

साथी तोहरे गाँव में

रमाकान्त मुकुल

कहाँ गइल

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

हमर गाम

कालीकान्त झा ‘बूच’

गाँव की पहाड़ी

देवेंद्र कुमार बंगाली

हम ठहरे गाँव के

देवेंद्र कुमार बंगाली

ग्राम-वासिनी

गोपालशरण सिंह

ग्राम

गोपालशरण सिंह

हिन्दवी उत्सव 2026

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