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राजनीति पर गीत

राजनीति मानवीय अंतर्क्रिया

में निहित संघर्षों और सहयोगों का मिश्रण है। लेनिन ने इसे अर्थशास्त्र की सघनतम अभिव्यक्ति के रूप में देखा था और कई अन्य विद्वानों और विचारकों ने इसे अलग-अलग अवधारणात्मक आधार प्रदान किया है। राजनीति मानव-जीवन से इसके अभिन्न संबंध और महत्त्वपूर्ण प्रभाव के कारण विचार और चिंतन का प्रमुख तत्त्व रही है। इस रूप में कविताओं ने भी इस पर पर्याप्त बात की है। प्रस्तुत चयन में राजनीति विषयक कविताओं का एक अनूठा संकलन किया गया है।

मुश्किल हुआ निबाह

विभूति तिवारी

आजादी पउलस के?

रामजियावान दास ‘बावला’

आयल चुनाव फेरु आय गइलैं

रामजियावान दास ‘बावला’

अबकी जिताइ के देखा हो पंचो

रामजियावान दास ‘बावला’

आइल फिर 26 जनउरी

रामजियावान दास ‘बावला’

जब से भइल बा पंचकुटी सरकार हो

रामजियावान दास ‘बावला’