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डर पर ग़ज़लें

डर या भय आदिम मानवीय

मनोवृत्ति है जो आशंका या अनिष्ट की संभावना से उत्पन्न होने वाला भाव है। सत्ता के लिए डर एक कारोबार है, तो आम अस्तित्व के लिए यह उत्तरजीविता के लिए एक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। प्रस्तुत चयन में डर के विभिन्न भावों और प्रसंगों को प्रकट करती कविताओं का संकलन किया गया है।

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

बह रहल बा

ए. कुमार ‘आँसू’

अब सुरक्षित कवन

अशोक द्विवेदी

हमरा हालात से

तैयब हुसैन पीड़ित

नइखे जानत के आवत बा

तैयब हुसैन पीड़ित

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

फूस के छप्पर

तैयब हुसैन पीड़ित

मुकरियाँ

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

क़द है पर बौने

डॉ. वेद मित्र शुक्ल