सरदार वल्लभ भाई पटेल के उद्धरण


अधिकार हज़म करने के लिए जब तक पूरी क़ीमत न चुकाई जाए, तब तक यदि अधिकार मिल भी जाए तो उसे गँवा बैठेंगे।
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संबंधित विषय : जीवन
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सिपाही यह कहे कि हमें लड़ना तो है, मगर वे हथियार नहीं रखने हैं जो सेनापति बतलाता है, तो वह लड़ाई नहीं चल सकती।
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मनुष्य रुपया कमाना जानता है, परंतु सभी को यह मालूम नहीं होता कि कमाई का सदुपयोग कैसे किया जाए।
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देश की सेवा करने में जो मिठास है, वह और किसी चीज़ में नहीं है।
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संबंधित विषय : देशभक्तिपूर्ण
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अपने मंदिरों को अछूतों के लिए खोलकर सच्चे देव-मंदिर बनाइए। आपके ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर के झगड़ों की दुर्गंध भी कँपकँपी लाने वाली है। जब तक आप इस दुर्गंध को नहीं मिटाएँगे, तब तक कोई काम नहीं होगा।
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मैं किसानों को भिखारी बनते नहीं देखना चाहता। दूसरों की मेहरबानी से जो कुछ मिल जाए, उसे लेकर जीने की इच्छा की अपेक्षा अपने हक़ के लिए मर-मिटना मैं ज़्यादा पसंद करता हूँ।
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अस्पृश्य की व्याख्या आप जानते हैं। प्राणी के शरीर में से जब प्राण निकल जाते हैं, तब वह अस्पृश्य बन जाता है। मनुष्य हो या पशु, जब वह प्राणहीन बनकर शव होकर पड़ जाता है—तब उसे कोई नहीं छूता, और उसे दफ़नाने या जलाने की क्रिया होती है। मगर जब तक मनुष्य या प्राणिमात्र में प्राण रहते हैं, तब तक वह अछूत नहीं होता। यह प्राण प्रभु का एक अंश है और किसी भी प्राण को अछूत कहना भगवान के अंश का, भगवान का तिरस्कार करने के बराबर है।
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जिसने ईश्वर को पहचान लिया, उसके लिए तो दुनिया में कोई अछूत नहीं है। उसके मन में ऊँच-नीच का भेद नहीं है।
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