
जिसने ईश्वर को पहचान लिया, उसके लिए तो दुनिया में कोई अछूत नहीं है। उसके मन में ऊँच-नीच का भेद नहीं है।
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आज हम जिसे अस्पृश्यता मानते हैं उसके लिए शास्त्र में कोई प्रमाण नहीं है।
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